केंद्र सरकार के आम बजट में किसानों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से जोड़ने और कुछ विशिष्ट फसलों को वैश्विक पहचान दिलाने की घोषणा के बाद इसका असर अब खेतों में दिखाई देने लगा है। कृषि प्रधान जनपद बाराबंकी में बजट की घोषणाओं की हकीकत जानने के लिए हमारी टीम सीधे जीरो ग्राउंड यानी खेतों तक पहुंची। खेतों में काम कर रहे किसानों से जब बातचीत की गई तो एआई आधारित खेती को लेकर उत्सुकता साफ नजर आई। हालांकि अधिकतर किसानों ने माना कि उन्हें अभी एआई तकनीक की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन जब यह बताया गया कि इस तकनीक से उन्हें खाद, बीज, सिंचाई, फसल रोग और मौसम की सटीक जानकारी पहले ही मिल सकेगी, तो किसानों के चेहरे पर खुशी साफ झलकने लगी। किसानों का कहना है कि अगर सही समय पर सही जानकारी मिल जाए तो लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ेगा। कई किसानों ने इसे “भविष्य की खेती” बताते हुए सरकार से प्रशिक्षण और आसान भाषा में जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की। वहीं किसानों ने बजट में किसान सम्मान निधि के लिए की गई व्यवस्था को भी सकारात्मक बताया। किसानों का कहना है कि यह राशि भले ही बड़ी न हो, लेकिन बीज, खाद और छोटी जरूरतों में यह सीधी मदद साबित होती है और खेती को संबल देती है। कुल मिलाकर बजट की घोषणाओं को लेकर बाराबंकी के खेतों में उम्मीद की नई फसल उगती दिख रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एआई तकनीक को जमीन पर कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।