उतरौला। क्षेत्र के लालनगर बिरदा और मिलौली बाघाजोत गांव में राप्ती नदी का कटान फिर तेज हो गया है। नदी गांव से महज 100 मीटर की दूरी पर पहुंच गई है। अब तक 300 बीघे से अधिक कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। खेतों में खड़ी गन्ने की फसल भी कटान के साथ नदी में जा रही है। पहले ही खेत और मकान गंवा चुके परिवारों के सामने अब रोटी, कपड़ा और मकान का संकट खड़ा हो गया है। कई परिवार सुरक्षित स्थान पर बसने के लिए अपना मकान खुद उजाड़ने की तैयारी कर रहे हैं। लालनगर बिरदा निवासी शादाब खान, अंसार, अशफाक खान, अतीक खान, शकीला बानो, तुफैल अहमद, बुधराम, अशोक कुमार, रामकुमार और दशरथ समेत कई ग्रामीणों की जमीन पहले ही नदी में समा चुकी है। शादाब खान का मकान भी कटान की भेंट चढ़ चुका है। वह अब उतरौला में रहने लगे हैं। अशफाक खान का मकान भी अब कटान की जद में है। इस बार शांति, पीर मोहम्मद, सीताराम और इतवारी समेत कई किसानों के खेत नदी के निशाने पर हैं। किसानों का कहना है कि गन्ने की फसल तैयार होने के बावजूद जमीन लगातार कट रही है। इससे फसल के साथ उनकी पूरी मेहनत और आय का सहारा भी नदी में समा रहा है। पिछले साल के पड़े हैं बंबू कैरेट -ग्रामीणों ने बताया कि पिछले साल कटान रोकने के लिए बांस की कैरेट और मिट्टी डालकर अस्थायी इंतजाम किया गया था। पिछले साल लगाए गए बांस के कैरेट अब भी मौके पर पड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस बार कटान शुरू होने के बावजूद प्रशासनिक कर्मचारी स्थिति देखने तक नहीं पहुंचे। प्रभावी बचाव कार्य नहीं होने से लोगों में भय बढ़ता जा रहा है। - कटान की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। कटान रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। कटान पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराया जाएगा। योगेंद्र शरण शाह, एसडीएम उतरौला