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राज्यसभा में सांसद की स्वरचित कविताओं से बांधा समां, VIDEO

अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 10 Dec 2025 07:29 PM IST

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राज्यसभा में बुधवार को एक अद्भुत क्षण देखने को मिला, जब गाजीपुर की राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने स्वरचित कविताओं के साथ जोरदार, ओजस्वी और भावपूर्ण भाषण देकर सदन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने स्वयं की लिखी मातृभूमि को शीश झुकाकर निस दिन वंदन हो जननी का, वंदे मातरम् के गुंजन से नित अभिनंदन हो जननी का... से किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ दो शब्द नहीं, वह शक्ति है जिसने अंग्रेजी हुकूमत के कोड़े रोक दिए, सामान्य लोगों को शहीद बना दिया और भय को स्वतंत्रता में बदल दिया। सांसद बलवंत ने कहा कि 1875 में कार्तिक शुक्ल नवमी के दिन बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने यह गीत नहीं लिखा था, उन्होंने स्वतंत्र भारत का भविष्य लिखा था। उन्होंने याद दिलाया कि महात्मा गांधी ने इसे सुस्त रक्त को भी जगा देने वाली जादुई शक्ति बताया था, जबकि श्री अरविंद ने कहा था कि वंदे मातरम् भारत के पुनर्जन्म का मंत्र है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक उन्हें भारत को जोड़ने का अवसर मिला, पर उन्होंने इतिहास और पहचान दोनों को खंडित किया।

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