मिहींपुरवा (बहराइच)। कभी कौड़ियाला नदी की धारा और आवागमन की मुश्किलों के बीच जीवन बसर करने वाला भरतपुर गांव अब एक नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश के पहले पूर्ण विस्थापित गांव के रूप में विकसित की जा रही भरतपुर पुनर्वास कॉलोनी अब आधुनिक शहरी सुविधाओं से युक्त हाईटेक बस्ती का स्वरूप लेने लगी है। नानपारा-लखीमपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सेमरहना में बसाई जा रही कॉलोनी में बिजली व्यवस्था पूरी हो चुकी है, जबकि सीसी सड़क, पक्की नालियों, चहारदीवारी और आवासों का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विशेष पहल पर शुरू हुई इस परियोजना में 136 विस्थापित परिवारों के लिए योजनाबद्ध ढंग से नए आवास तैयार किए जा रहे हैं। विद्युत विभाग ने करीब 57 लाख रुपये की लागत से बिजली के पोल, ट्रांसफार्मर, केबल और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था पूरी कर दी है। वहीं लोक निर्माण विभाग की ओर से करीब 3.70 करोड़ रुपये की लागत से सड़क, नाली और चहारदीवारी का निर्माण कराया जा रहा है। पूरी कॉलोनी को आठ सेक्टरों में विकसित किया गया है। यहां 5.5 मीटर चौड़ी सीसी सड़कें बनाई जा रही हैं। सड़कों के दोनों ओर पक्की नालियां होंगी, जिससे जल निकासी की बेहतर व्यवस्था रहेगी। कॉलोनी का प्रवेश द्वार गेटेड कॉलोनी की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। सभी सड़कों पर एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। ग्रामीण, शहरी और संयुक्त परिवारों की जरूरतों के अनुसार तीन प्रकार के आवास बनाए जा रहे हैं, हालांकि बाहरी डिजाइन एक जैसा रखा गया है। इस पुनर्वास योजना की शुरुआत कौड़ियाला नदी में हुए दर्दनाक नौका हादसे के बाद हुई थी, जिसमें भरतपुर के नौ लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने गांव को सुरक्षित स्थान पर बसाने की घोषणा की थी। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के नेतृत्व में 136 परिवारों को आवासीय भूखंडों के पट्टे वितरित किए गए। शनिवार को जिलाधिकारी ने निर्माणाधीन कॉलोनी का निरीक्षण कर संबंधित विभागों को एक माह के भीतर सभी कार्य गुणवत्ता के साथ पूरे करने के निर्देश दिए। निर्माण की रफ्तार को देखते हुए भरतपुर अब केवल विस्थापितों का नया ठिकाना नहीं, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से लैस पुनर्वास के प्रदेशस्तरीय मॉडल के रूप में उभर रहा है।