तारुन ब्लॉक स्थित गौराघाट रामचौरा का 7 करोड़ रुपये की लागत से कायाकल्प किया जा रहा है। यह स्थल प्राचीन काल से ही प्रभु राम के 14 वर्ष के वनवास के दौरान प्रथम रात्रि विश्राम स्थल के रूप में जाना जाता है। अयोध्या से लगभग 21 किलोमीटर दूर तमसा नदी के किनारे स्थित रामचौरा वह स्थान है, जहां भगवान राम ने वनवास की पहली रात बिताई थी। उनके साथ अयोध्या की आम जनता भी पैदल यहाँ तक आ गई थी। प्रभु राम ने अगली सुबह माता सीता और लक्ष्मण के साथ रथ पर सवार होकर इस तरह प्रस्थान किया था, ताकि कोई उनके मार्ग का ठीक से पता न लगा सके और लोग अयोध्या लौट जाएँ। राम मोल निषाद ने बताया कि इस कायाकल्प परियोजना के तहत राम की पैड़ी, प्रवेश द्वार, गुंबद, यात्री शेड और अन्य सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। वर्तमान में भी इस स्थल पर समय-समय पर मेले, भंडारे और पूजा-पाठ का आयोजन होता रहता है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, अयोध्या में दर्शन-पूजन के बाद कई लोग रामचौरा घाट पर रात्रि विश्राम करते हैं और फिर यहाँ से भरतकुंड तपोवन भूमि के लिए प्रस्थान करते हैं। मंदिर का कार्य पूरा होने और पर्यटन विभाग द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों के बाद, यह स्थल एक भव्य पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा। इससे भक्तों की भीड़ में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में व्यापार भी बढ़ेगा। इसके लिए होम स्टे परियोजनाएं भी लाई गई हैं।