रामनगरी में आस्था और परंपरा का संगम लिए वट सावित्री व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ रखा गया। व्रती महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु की कामना के साथ वट वृक्ष की 12 बार फेरे लगाकर पूजा अर्चना की। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन व्रती महिलाएं पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए बरगद की पूजा करती हैं। वट सावित्री का पर्व सुहागिनों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन सती सावित्री की तरह पति की लंबी उम्र की कामना के लिए महिलाएं व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा महादेव मान कर करती हैं। मान्यता है कि इस दिन सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लिए थे। अयोध्या में भी महिलाओं ने व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए बरगद की पूजा की। आईए जानते हैं क्या कह रही हैं व्रती महिलाएं।