अयोध्या में राममंदिर से सटे प्राचीन रंगमहल में विवाहोत्सव की विशिष्ट परंपरा है। यहां आज भी 250 वर्ष पुराने काष्ठ के मंडप में विवाह की रस्म निभाई जाती है। मंदिर के भव्य आंगन में मंडप को सजाने का काम शुरू कर दिया गया है। मान्यता है कि जब माता सीता विवाहोपरांत अयोध्या की धरती पर आईं, तब कौशल्या को सीता माता का स्वरुप इतना अच्छा लगा कि उन्होंने रंग महल सीता जी को मुंह दिखाई में दिया था। यहां मां सीता की उपासना होती है। मंदिर के महंत रामशरण दास ने बताया कि विवाह पंचमी का मुख्य पर्व छह दिसंबर को मनाया जाएगा। इस दिन हाथी, घोड़े, रथ से सज्जित भव्य रामबरात निकाली जाएगी। तीन दिसंबर को मंडप पूजन के साथ उत्सव का श्रीगणेश होगा। चार दिनों तक रामजन्मभूमि से लेकर धनुषयज्ञ तक की लीला का मंचन किया जाएगा। चार दिसंबर को हल्दी पूजन का कार्यक्रम होगा। पांच दिसंबर को मंड़वा पूजन की रस्म अदा की जाएगी। छह दिसंबर को भव्य बरात निकलेगी इसी दिन रात में श्रीसीताराम के विवाहोत्सव का लोकाचार विधिविधान पूर्व संपन्न कराया जाएगा।