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Ayodhya: गो सेवा आयोग अध्यक्ष ने अखिलेश पर साधा निशाना... बोले - भारत के बाहर जाकर करें राजनीति

ishwar ashish Updated Tue, 15 Apr 2025 04:21 PM IST

गायों के संवर्धन व संरक्षण के लिए गो सेवा आयोग अयोध्या पहुंचा है। मंडलायुक्त सभागार में आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्त, कमिश्नर गौरव दयाल और आईजी प्रवीण कुमार ने मंडल के अफसरों के साथ बैठक की। आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्त ने गोशाला में दुर्गंध वाले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अखिलेश को गाय, किसान और खेती से कोई मतलब नहीं है। उनको राजनीति से इस्तीफा दे देना चाहिए। उनका न कोई विचार है और न ही विजन। अखिलेश यादव एक ऐसे अनजान नेता हैं जिन्हे गांव, किसान और खेती से कोई मतलब नहीं है। गो वंश के लिए उन्होंने अपमानित करने वाली बात कही है। वह हिंदुस्तान की राजनीति करने के लायक नहीं हैं। उनको जहां राजनीति करनी हो वहां जाएं, भारत के बाहर जाकर राजनीति करें। सबसे बड़ा गोवंश हमारे किसानों के घर में है। दूसरा सरकार की गोशालाओं में है। तीसरा स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से संचालित आश्रय स्थल में है। कुछ गोवंश अभी सड़कों पर घूम रहे हैं। चारों प्रकार के जो गोवंश हैं, उनकी समीक्षा बैठक कर रहे हैं। गाय हमारी समस्या नहीं, गाय हमारा समाधान है। खेतों में सूक्ष्म जीवाश्म खेती का आधार है, जो गाय के गोबर से ही पूर्ण होता है। जब धरती में गोमूत्र और गोबर जाएगा तो धरती सुरक्षित रहेगी और बच्चों को परिपूर्ण भोजन मिलेगा। गोबर और गोमूत्र से खेती होगी तो खेती की लागत कम आएगी। आने वाले 2047 में विकसित भारत का आधार गांव, गोवंश व किसानों की खेती होगी। गाय के गोबर से खेती होगी। जैविक खेती होगी। खेत का रकबा कम होता जा रहा है। आबादी बढ़ती जा रही है। भूमि के मजबूत होने के लिए हमारी देशी गाय का गोबर और गोमूत्र है। गो सेवा आधारित खेती की जो परिकल्पना हमारे प्रधानमंत्री ने की है, उसकी हम लोग समीक्षा कर रहे हैं। हरे चारे का उत्पादन और गो आश्रय का संचालन हम स्वयंसेवी संस्थाओं को देने वाले हैं। मुख्यमंत्री निराश्रित गो वंश योजना के अंतर्गत एक गाय ले जाइए 1500 रुपये मिलेगा। चार गाय ले जाइए 6000 रुपए मिलेगा। भारत कृषि प्रधान देश है और कृषि का आधार हमारी गाय हैं। खेतों में जब गोबर और गोमूत्र जाता था तो उत्पादन बढ़ता था। खेतों में जो हम फर्टिलाइजर डाल रहे हैं उससे धरती जहरीली हो रही है। उत्पादन क्षमता कम हो रही है, बीमारियां बढ़ रही हैं।

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