रामनगरी अयोध्या की पावन धरती पर स्थित दशरथ महल में फूलों की होली का अनुपम उत्सव बड़े ही भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। बड़ा स्थान परिसर रंग, रस और भक्ति के अद्भुत संगम का साक्षी बना। जैसे ही संतों और श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे पर पुष्पवृष्टि की, वातावरण गुलाब, गेंदा और कनेर की सुगंध से महक उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं त्रेतायुग की छटा पुनः साकार हो उठी हो। आंगन में सजी गीत-संगीत की महफिल ने उत्सव में चार चांद लगा दिए। मृदंग की थाप, झांझ की झंकार और हारमोनियम की मधुर तान पर जब होली के पारंपरिक भजन गूंजे, तो श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। 'होरी खेले रघुवीरा अवध में' जैसे होली गीतों ने पूरे परिसर को राममय बना दिया। संत-महात्माओं ने भी सादगी और आनंद के साथ फूलों की होली खेली।इस अवसर पर मंदिर के महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य, महंत जन्मेजय शरण, महंत अवधेश दास, महंत कृपालु रामभूषण दास सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।