अयोध्या में मणिराम दास छावनी में आयोजित संत समाज की बैठक में राम मंदिर से जुड़े प्रकरण पर न्यायिक प्रक्रिया और जांच एजेंसियों पर भरोसा जताने की अपील की गई। नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने कहा कि मामला न्यायालय और जांच एजेंसियों के संज्ञान में है, इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी प्रकार का अनर्गल प्रचार-प्रसार नहीं होना चाहिए। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन 500 वर्षों के लंबे संघर्ष, संतों के त्याग और लाखों रामभक्तों की आस्था का परिणाम है। ऐसे में किसी एक घटना के आधार पर पूरे आंदोलन, संत समाज या राम मंदिर की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का प्रयास उचित नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है और जांच निष्पक्ष रूप से चल रही है। इसलिए सभी को जांच एजेंसियों को अपना कार्य करने का अवसर देना चाहिए। यदि जांच से पहले तरह-तरह के आरोप और प्रचार किए जाएंगे तो इससे भ्रम की स्थिति पैदा होगी और जांच भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से भी अपील की गई कि वे इस संवेदनशील विषय पर अनावश्यक बयानबाजी से बचें और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करें। चंपत राय के सवाल पर कहा कि उन्होंने नैतिक आधार पर पहले ही इस्तीफा दे दिया है, इसलिए उन्हें दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए।