रामनवमी के निकट आते ही अयोध्या के मठ-मंदिरों में गैस सिलिंडर की उपलब्धता और बढ़ती कीमत को लेकर संतों की चिंता बढ़ने लगी है। रामनगरी के हजारों मंदिरों और आश्रमों में हर वर्ष रामनवमी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए अन्नक्षेत्र चलाया जाता है, लेकिन इस बार गैस सिलिंडर की किल्लत और महंगाई से व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं राम मंदिर से सटे अमावा मंदिर में संचालित राम रसोई में कोयले की भट्ठी पर भोजन पकने लगा है। मंदिर के व्यवस्थापक पंकज कुमार ने बताया कि रसोई गैस की किल्लत को देखते हुए कोयले की भट्ठी का निर्माण आश्रम परिसर में करा दिया गया है। अब उसी पर भोजन पकाया जा रहा है। अन्न क्षेत्र का संचालन किसी भी सूरत में बंद नहीं किया जाएगा। जितने सिलिंडर की जरूरत है, उतनी आपूर्ति ही नहीं हो पा रही है, इसलिए यह वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई है। अमावा मंदिर से सटे रंगमहल मंदिर में शुक्रवार को भंडारा था, लेकिन आवश्यकता के अनुरूप सिलिंडर नहीं मिल सका तो कोयले की भट्ठी पर भोजन पकाकर भंडारे की परंपरा निभाई गई। अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। राम मंदिर के खुलने के बाद यहां रोजाना औसतन एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और बड़े पर्वों पर यह संख्या तीन से पांच लाख प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। ऐसे में रामनवमी पर 15 से 20 लाख श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। रामनगरी में रामनवमी के दौरान छोटे-बड़े करीब तीन से चार हजार मठ-मंदिरों में अन्नक्षेत्र संचालित किए जाते हैं। इन अन्नक्षेत्रों में रोजाना सैकड़ों श्रद्धालुओं को नि:शुल्क भोजन कराया जाता है। कई स्थानों पर प्रतिदिन 5 से 10 सिलिंडर तक गैस की खपत होती है। सिलिंडर की किल्लत से यह व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।