अयोध्या की पावन धरती पर शनिवार तड़के भोर चार बजकर दो मिनट पर पंचकोसी परिक्रमा का शुभारंभ हुआ। शुभ मुहूर्त में लाखों श्रद्धालुओं ने “जय श्रीराम” के गगनभेदी नारों के साथ परिक्रमा प्रारंभ की। श्रीराम की नगरी भक्ति और आस्था के सागर में डूबी हुई है। हर ओर उल्लास, भजन-कीर्तन और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना हुआ है।
भगवान श्रीराम की पवित्र भूमि की लगभग 15 किलोमीटर की यह परिक्रमा रात दो बजकर 57 मिनट तक चलेगी। देशभर से पहुंचे लाखों श्रद्धालु इस पावन यात्रा में शामिल हुए हैं। भक्तों ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ परिक्रमा पथ पर चलकर भक्ति और विश्वास की मिसाल पेश की। जगह-जगह मंदिरों में राम नाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन हो रहा है। पूरा नगर “जय श्रीराम” के नारों से गूंज उठा है और चारों ओर उत्सव जैसा माहौल है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। परिक्रमा मार्ग पर सुरक्षा बलों की विशेष तैनाती की गई है, जबकि ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। स्वास्थ्य शिविर, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था, ट्रैफिक नियंत्रण तथा सफाई की मजबूत व्यवस्थाओं से तीर्थयात्रियों को कोई असुविधा न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
चौदह कोसी परिक्रमा की सफलता के बाद पंचकोसी परिक्रमा ने रामनगरी को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचकोसी परिक्रमा मोक्षदायिनी मानी जाती है—यह न केवल पापों का नाश करती है, बल्कि श्रद्धालुओं के जीवन को पवित्र और कल्याणकारी बनाती है।
रामनगरी की इस अद्भुत आस्था यात्रा ने हर भक्त के हृदय में भक्ति और उल्लास की ऐसी छाप छोड़ी है, जो जीवनभर बनी रहेगी। अयोध्या इस समय सचमुच “भक्ति, विश्वास और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम” की नगरी के रूप में जगमगा रही है।