अमेठी सिटी। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर 18 जनवरी को रायबरेली के सलोन से शुरू हुई यात्रा बुधवार को गौरीगंज पहुंचकर समाप्त हुई। यह यात्रा विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए दयालापुर स्थित कार्यालय पर पहुंची। यात्रा में शामिल लोगों ने एक बार फिर गोमाता को राज्य माता और राष्ट्र माता घोषित करने की अपनी मांग दोहराई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि गोमाता भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक अभिन्न अंग है। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों ने इस मांग का समर्थन किया। कराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की प्ररेणा से अमेठी संसदीय क्षेत्र के सलोन से पैदल यात्रा का शुभांरभ 18 जनवरी को हुआ। यात्रा तिलोई, शंकरगंज, जगदीशपुर, कंजास, मुसाफिरखाना रुदोली, कनकसिंहपुर, अमेठी बारामासी होते हुए बुधवार को गौरीगजं पहुंच दयालापुर स्थित कार्यालय पर समाप्त हुई। यात्रा में शामिल लोगों ने कहा कि गो संरक्षण और धार्मिक मूल्यों की रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इन महत्वपूर्ण पहलुओं को बनाए रखने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज में गोवंश के महत्व को रेखांकित करना और उसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाना रहा। यात्रा के समापन अवसर पर प्रयागराज संगम में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को गंगा स्नान से रोके जाने और बटुकों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर कड़ी आपत्ति जताई गई। वक्ताओं ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे अनुचित करार दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों में इस तरह की बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है। यात्रा में गोसांसद राकेश तिवारी, जिलाजीत पांडेय, सूरज पांडेय, कृष्णानंद पांडेय, हरिप्रसाद द्विवेदी और हरिभान सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।