जलालपुर नगर के अलग-अलग मोहल्ले में आकर्षक ताजिया तैयार की जा रही हैं। मोहर्रम का चांद दिखाई देने के बाद से ही कारीगर युद्धस्तर पर ताजियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। जलालपुर कस्बा नगर व गांव में छोटे-बड़े और आकर्षक डिजाइनों वाली ताजियाओं का निर्माण किया जा रहा है। ताजिया बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि यह उनका पुश्तैनी व्यवसाय है। वे धार्मिक आस्था और परंपरा के साथ निभाते आ रहे हैं। कारीगर गुलाम हैदर और हकीम मोहम्मद हुसैन ने बताया कि ताजिया निर्माण में विशेष सावधानी और सफाई का ध्यान रखा जाता है। उन्होंने कहा कि धर्म और आस्था को ध्यान में रखते हुए ताजियों की कीमत मनमाने ढंग से नहीं रखी जाती, बल्कि मेहनत और लागत के अनुसार ही मूल्य निर्धारित किया जाता है, ताकि किसी ताजियादार को परेशानी न हो।