पीस पार्टी ने मुस्लिम अनुसूचित जातियों को संविधान के अनुच्छेद 341(3) के तहत आरक्षण देने की मांग को लेकर राष्ट्रपति को पत्र भेजा है। कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की। पार्टी जिलाध्यक्ष असद के नेतृत्व में भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि 1936 से लेकर स्वतंत्रता के बाद तक सभी धर्मों की अनुसूचित जातियों को आरक्षण का लाभ दिया जाता था, लेकिन 1950 के राष्ट्रपति आदेश के बाद से केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म की अनुसूचित जातियों को ही आरक्षण मिल रहा है, जबकि मुस्लिम अनुसूचित जातियों को इससे बाहर रखा गया। पत्र में उल्लेख किया गया है कि 1956 में सिख धर्म को और 1990 में बौद्ध धर्म को अनुसूचित जाति सूची में शामिल किया गया, लेकिन मुस्लिम समाज की अनुसूचित जातियों को अब तक इस श्रेणी में स्थान नहीं दिया गया। पीस पार्टी ने कहा कि जस्टिस रंगनाथ मिश्रा आयोग (2007) और सच्चर समिति (2006) की रिपोर्टों में मुस्लिम अनुसूचित जातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर पाई गई है। इसके बावजूद इन जातियों को एससी श्रेणी में शामिल करने के संबंध में अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि मुस्लिम अनुसूचित जातियां सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक दृष्टि से अन्य एससी समुदायों के समान ही पिछड़ी हुई हैं, ऐसे में उन्हें आरक्षण से वंचित रखना भेदभावपूर्ण है। मांग की गई है कि उन्हें भी अनुसूचित जाति श्रेणी में शामिल कर समान अवसर प्रदान किया जाए, जिससे वे सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उठा सकें। इस अवसर पर प्रदेश सचिव जहूर अहमद, वरिष्ठ पदाधिकारी एम. अफजल नायब, रामबाबू अंसारी सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। पार्टी ने इसे न्याय व समानता की दिशा में जरूरी कदम बताते हुए राष्ट्रपति से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।