''पैसा मिला, नौकरी मिली पर मैने क्या खोया, यह मैं ही जानती हूं। मेरा दर्द कितना बड़ा है यह कोई और नहीं समझ सकता। न ही मेरे नुकसान की भरपाई हो सकती है। हां एक शिकवा जरूर है कि मेरे पति मुकुल के बलिदान को दस साल बाद भी वह सम्मान नहीं मिला। सरकारें बदल गईं पर मुकुल को वीरता जैसा पुरस्कार आज तक नहीं दिया गया।'' यह कहते हुए मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी का गला भर्रा जाता है।