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VIDEO: 14-15 की उम्र में भी पाइल्स, हर दूसरे शख्स को परेशानी

चाऊमीन, बर्गर, मोमोज खाए। खेलकूद-व्यायाम के बजाय मोबाइल-लैपटॉप पर ज्यादा देर तक समय बिताया। इन आदतों से पाइल्स (बवासीर) की परेशानी तेजी से बढ़ रही है। हालत ये है कि पीड़ितों में 14-15 साल के बच्चों संख्या तेजी से बढ़ रही है। हरीपर्वत स्थित होटल में आगरा सर्जंस एसोसिएशन की कार्यशाला के अंतिम दिन चिकित्सकों से बातचीत में बढ़ते मरीजों पर चिंता जताई। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अमित श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चों और युवाओं में फास्टफूड-जंकफूड, बाजार में नाश्ता, कोल्ड ड्रिंक आदि का उपयोग तेजी से बढ़ा है। नौकरी, मोबाइल-लैपटॉप के चलते घंटों बैठना भी पड़ रहा है। खाने-पीने का शेड्यूल भी बिगड़ गया है। इससे हर दूसरे व्यक्ति में पाइल्स या इसके लक्षण मिल रहे हैं। 20-40 साल की उम्र के लोगों में ये बीमारी तेजी से बढ़ी है। पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि लोग हरी सब्जी, सलाद, फल और मोटे अनाज का उपयोग कम कर रहे हैं। बच्चे भागदौड़ वाले खेलकूद कम कर रहे हैं। तला और बाजार का भोजन अधिक उपयोग करने से 14-15 साल की उम्र में भी पाइल्स की परेशानी बढ़ रही है। महिलाओं में भी ये परेशानी मिल रही है। प्रसव के बाद फिशर का खतरा अधिक हो रहा है। कार्यशाला में डॉ. मयंक जैन, डॉ. जगतपाल सिंह, डॉ. ज्ञानप्रकाश, डॉ. आरएम पचौरी, डॉ. जेपीएस शाक्य, डॉ. ऋषि महाजन, डॉ. उत्कर्ष, डॉ. अपूर्व चतुर्वेदी, डॉ. शरद गुप्ता, डॉ. जूही सिंघल, डॉ. पुनीत श्रीवास्तव, डॉ. समीर कुमार आदि ने भी व्याख्या दिए।

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