फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

VIDEO:मलेरिया रोकथाम में प्रकृति की मददगार ड्रैगन मक्खी, आगरा में दर्ज हैं 30 से अधिक प्रजातियां

पंकज जैन Updated Mon, 20 Jul 2026 04:35 PM IST

आगरा। मलेरिया और डेंगू से बचाव के लिए जहां एक ओर स्वास्थ्य विभाग अभियान चला रहा है, वहीं प्रकृति ने भी अपना एक अनोखा प्रहरी तैयार कर रखा है। तालाबों, वेटलैंड, नदियों और नहरों के आसपास उड़ने वाली ड्रैगन मक्खी और डैमसेलफ्लाई मच्छरों की संख्या नियंत्रित कर पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। आगरा और आसपास के क्षेत्रों में इनकी 30 से अधिक प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं। सूर सरोवर, जोधपुर झाल, यमुना व चंबल नदी के तटीय क्षेत्र, तालाबों, नहरों और अन्य वेटलैंड में इन कीटों की अच्छी उपस्थिति दर्ज की गई है। मानसून के दौरान जलभराव, हरियाली और अनुकूल वातावरण मिलने से इनकी संख्या और गतिविधियां बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्राकृतिक शिकारी कीटों का संरक्षण मच्छरजनित रोगों की रोकथाम में भी मददगार साबित हो सकता है। आगरा कॉलेज के जन्तुविज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. गीता माहेश्वरी बताती हैं कि ड्रैगन मक्खी प्रकृति के सबसे प्रभावी प्राकृतिक शिकारी कीटों में शामिल है। एक वयस्क ड्रैगन मक्खी प्रतिदिन 100 से 500 तक मच्छरों का शिकार कर सकती है। वहीं इसके जलीय शिशु (निम्फ) पानी में रहने वाले मच्छरों के लार्वा को खाकर उनकी संख्या नियंत्रित करते हैं। ये विशेष रूप से एनोफिलीज और क्यूलेक्स प्रजाति के मच्छरों का शिकार करती हैं। हवा में उड़ते हुए शिकार को सटीकता से पकड़ने की इसकी क्षमता इसे बेहद कुशल शिकारी बनाती है।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें