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VIDEO: युवाओं के जीवन में उजाला ला रहीं बुजुर्गों की काॅर्निया

आगरा में अब 80-85 साल के बुजुर्गों की कॉर्निया भी ट्रांसप्लांट हो रही हैं। नई तकनीकी से बुजुर्गों की कॉर्निया युवाओं के जीवन में उजाला ला रही हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में एडवांस तकनीक से 81 साल के बुजुर्ग की कॉर्निया युवा नेत्रहीन को लगाई गईं। इससे उसकी दुनिया रोशन हो गई। एसएन की नेत्र बैंक प्रभारी डॉ. शेफाली मजूमदार ने बताया कि कॉर्निया में तीन परत होती हैं। उम्र बढ़ने पर कई बार पहली परत खराब हो जाती है। इसे ट्रांसप्लांट न कर चिकित्सकीय पढ़ाई में ही उपयोग करते हैं। अब डीप एंटीरियर लैमेलर केराटोप्लास्टी (डाल्क) तकनीक से 80-85 साल के बुजुर्ग की कम रोशनी वाली कॉर्निया भी ट्रांसप्लांट की जा रही हैं। ये अत्याधुनिक कॉर्नियल ट्रांसप्लांट तकनीक है। इसमें बुुजुर्ग की कॉर्निया की बाहरी परतों (स्ट्रोमा) का ही उपयोग करते हैं। नेत्रहीन युवाओं की कॉर्निया की अंदरूनी एंडोथेलियल परत स्वस्थ होती है, लेकिन ऊपरी दोनों परत खराब होने से दिखना बंद हो जाता है। ऐेसे में बुजुर्ग मरीजों की डाल्क तकनीक से ऊपरी दो परत को नेत्रहीन की पहली परत पर लगा देते हैं और मरीज को दिखने लगता है। इससे बुजुर्गों की शतप्रतिशत कॉर्निया का ट्रांसप्लांट होने लगा है। इससे नेत्रहीन मरीजों की वेटिंग भी कम होगी। नेत्र बैंक प्रभारी ने बताया कि बीते 10 साल में 405 मरीजों के कॉर्निया ट्रांसप्लांट की जा चुकी हैं। 21 मार्च को विभाग में एडवांस कॉर्निया ट्रांसप्लांट ओटी भी बनी है। इसमें कॉर्निया ट्रांसप्लांट शुरू हो चुका है। नई तकनीकी और ओटी से लोगों में नेत्रदान के लिए बढ़ावा भी मिलेगा।

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