आगरा के कोठी मीना बाजार मैदान में निर्माण पर हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी मनीष बंसल और गजानन सहकारी समिति सचिव के विरुद्ध अवमानना नोटिस जारी किया है। 17 जुलाई तक जवाब मांगा है। वादी के दावे के अनुसार 66 साल पहले 30 बीघा, 16 बिस्वा भूमि नीलामी में खरीदी गई थी। 4200 रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाई थी। यह जमीन उस समय बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए मुस्लिम जमींदारों की थी। जिसे निष्क्रांत संपत्ति मानते हुए भारत संघ के पुनर्वास मंत्रालय ने सार्वजनिक रूप से नीलाम किया था। वादी राम सिंह ने 18 जून 1960 को 4200 रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाकर इसे खरीदा था। 16 जुलाई 1962 को भूमि विक्रय पत्र (सेल डीड) और 1 फरवरी 1962 को वास्तविक कब्जा सौंपा गया था। वादी के पुत्र राजेंद्र सिंह ने बताया कि वह फिरोजाबाद रहते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पाठक वृंदावन वैदिक आश्रम ट्रस्ट और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से बंजर आबादी भूमि को कृषि भूमि दर्शाकर खेवट में नाम दर्ज कर लिए गए। उन्होंने कहा कि सिविल न्यायालय में 38 साल चले मुकदमे में अदालत ने मेरे पक्ष में डिक्री की। डीएम को नामांतरण के आदेश दिए। अदालत ने तब ट्रस्ट की ओर से प्रस्तुत 1882 का पट्टा और 1902 की ट्रस्ट डीड को शून्य माना था। नामांतरण आदेश के खिलाफ प्रशासन ने हाईकोर्ट में स्टे के लिए अपील की। स्टे के बावजूद प्रशासन और ट्रस्ट मिलकर अवैध निर्माण करा भूमि विवाद में जटिलताएं उत्पन्न कर रहे हैं। वादी का आरोप है कि अवमानना नोटिस जारी होने के बाद भी भूमि पर निर्माण जारी है। वहीं, डीएम मनीष बंसल का कहना है कि प्रशासन की तरफ से कोर्ट में जवाब दाखिल किया जाएगा।