बात उस शख्स की जिसके लिए संगीत, सुर और नमाज़ में कोई फर्क नहीं। वो मंदिरों में शहनाई बजाते थे, सरस्वती के उपासक थे, उन्हें गंगा से बेपनाह लगाव था तो वहीं पांच वक्त के नजामी भी थे। जी हां, बात भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खां की। देखिए, अमर उजाला टीवी की स्पेशल रिपोर्ट।