सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश ने हिमाचल प्रदेश सरकार के उस निर्णय का कड़ा विरोध किया है। इसके तहत प्रदेश में निजी क्षेत्र में काम करने वाले कामगार साल की एक तिमाही में 144 घंटे का ओवरटाइम कर सकेंगे। इसके लिए प्रदेश की कांग्रेस सरकार हिमाचल प्रदेश दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान स्थापना अधिनियम में बड़ा बदलाव करेगी। इस संबंध में उद्योग, श्रम एवं रोजगार मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने संशोधन विधेयक पटल पर रखा है। सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि इस विधेयक में प्रस्तावित किए गए संशोधनों के अनुसार अधिनियम की धारा 7(2)(अ) में निर्धारित ओवरटाइम की सीमा को बदला जाएगा। वर्तमान में यह सीमा प्रति तिमाही 50 घंटे है, जिसे बढ़ाकर 144 घंटे प्रति तिमाही किया जाना प्रस्तावित है। ओवरटाइम का भुगतान 7(2)(ब) के तहत सामान्य प्रति घंटा दोगुना के हिसाब से होगा परंतु व्यावहारिकता व सच्चाई कुछ और ही है। हिमाचल प्रदेश के ज्यादातर व्यापारिक प्रतिष्ठानों में मजदूरों के संगठन व यूनियन के अभाव में मजदूरों से आठ घंटे से ज्यादा कार्य करवाने के बावजूद उन्हें आठ घंटे का वेतन भी उपलब्ध नहीं हो पाता है। अब कानूनी रूप से ओवरटाइम काम के घंटों को एक तिमाही में 144 करने से मालिकों द्वारा मजदूरों की लूट व शोषण का लाइसेंस मालिकों के पास होगा। सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश ओवरटाइम कार्य के इस निर्णय व चार लेबर कोड के खिलाफ 7 दिसंबर को मंडी में होने वाली राज्य कमेटी बैठक में आंदोलन की रणनीति तय करेगी।