फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Tonk News: मकर संक्रांति पर 80 किलो के विशाल ‘दड़े’ से खेला गया पारंपरिक खेल, 12 गांवों के खिलाड़ी हुए शामिल

Thu, 15 Jan 2026 03:29 PM IST
टोंक ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक

मकर संक्रांति के  मौके पर जहां प्रदेश भर में आसमान पतंगों से रंगा नजर आया, वहीं राजस्थान के टोंक जिले के आंवा कस्बे में इस पर्व का नजारा बिल्कुल अलग रहा। यहां पतंगबाजी नहीं, बल्कि करीब 80 किलो वजनी विशाल ‘दड़े’ से पारंपरिक खेल खेला गया, जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे।

पूर्व मंत्री ने किया खेल का उद्धाटन 
शौर्य, रोमांच और लोक आस्था से जुड़ा यह अनोखा खेल मकर संक्रांति के दिन हर वर्ष परंपरागत रूप से आयोजित किया जाता है। गढ़ चौक में आयोजित इस खेल का शुभारंभ पूर्व कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी, पूर्व राजपरिवार के सदस्य तथा सरपंच दिव्यांश महेंद्र भारद्वाज ने दड़े को ठोकर मारकर किया।

पुराने कपड़ों, जूट और चमड़े से तैयार किया गया था दड़ा
वर्ष 2026 में खेले गए इस दड़े का वजन लगभग 80 किलो रहा। दड़े को पुराने कपड़ों, जूट और चमड़े से तैयार किया गया था, जिसे खेल से पहले तीन दिनों तक पानी में भिगोकर और अधिक भारी बनाया गया।

12 गांवों के लोग खेल देखने के लिए रहे मौजूद 
इस पारंपरिक आयोजन में आंवा सहित आसपास के 12 गांवों के बारहपुरा क्षेत्र के हजारों युवा और बुजुर्ग पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए। खेल के दौरान गढ़ चौक जनसैलाब से भर गया और दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला।

रियासत काल में हुई थी खेल की शुरुआत 
इतिहासकारों और ग्रामीणों के अनुसार, इस खेल की शुरुआत रियासत काल में हुई थी। उस समय राजा-महाराजा युवाओं की शक्ति, साहस और फुर्ती परखने के उद्देश्य से इस खेल का आयोजन करवाते थे।

खेल देता है संकेत
यह खेल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे आने वाले वर्ष के अकाल या सुकाल का संकेत भी माना जाता है। मान्यता है कि यदि दड़ा दूनी दरवाजे की ओर जाता है, तो इसे अच्छी वर्षा और सुकाल का संकेत माना जाता है। वहीं, यदि दड़ा अखानी यानी रामपुरा दरवाजे की ओर जाए, तो अकाल की आशंका जताई जाती है। जबकि दड़ा यदि गढ़ चौक में ही रुक जाए, तो इसे औसत वर्षा का संकेत माना जाता है।

ये भी पढ़ें: सीबीएन का बड़ा एक्शन, ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़, लाखों का नशीला पदार्थ जब्त

खेल के दौरान मौजूद था पुलिस का जाप्ता
ग्रामीणों और बुजुर्गों का कहना है कि दड़ा महोत्सव केवल एक खेल नहीं, बल्कि यह प्रकृति, खेती और ग्रामीण जीवन से जुड़ी लोक मान्यताओं तथा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। मकर संक्रांति पर आंवा का यह आयोजन सामाजिक समरसता, लोक आस्था और पारंपरिक विरासत को सहेजने का सशक्त संदेश देता है। खेल के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की ओर से अतिरिक्त पुलिस जाप्ता तैनात किया गया था।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें