तिब्बती यूथ कांग्रेस का 18 सदस्यीय बाइक रैली दल 15 हजार किलोमीटर की बाइक रैली पर निकला हुआ है। दल के माउंट आबू पहुंचने पर स्थानीय लोगों द्वारा अभिनंदन किया गया। इस दौरान रैली में सम्मिलित सदस्यों का कहना था कि वे तिब्बत की संस्कृति एवं सभ्यता को बचाने के लिए बाइक रैली पर निकले हैं। उनकी मांग है कि भारत सरकार चीन पर दवाब डालकर तिब्बत की सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय संस्कृति को बचाने में उनकी सहायता करे।
तिब्बती युवा कांग्रेस सदस्यों द्वारा अरुणाचल प्रदेश के भारत-तिब्बत सीमा स्थित बुमला दर्रे से एक ऐतिहासिक बाइक रैली की शुरुआत की और यह रैली 19 से अधिक राज्यों में 15,000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इसी के तहत यह बाइक रैली माउंट आबू पहुंची। इसका उद्देश्य चीन के अवैध कब्जे और तिब्बत में हो रहे सांस्कृतिक विनाश के खिलाफ आवाज उठाना है। इसका उद्देश्य चीन के अवैध कब्जे और तिब्बत में हो रहे सांस्कृतिक विनाश के खिलाफ आवाज उठाना है। यह रैली तिब्बत में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन और सांस्कृतिक नरसंहार पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना चाहती है। यह बाइक रैली माउंट आबू पहुंची और इसका नेतृत्व तिब्बतियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष गोपो दुदंग कर रहे हैं। इस बाइक रैली में 18 सदस्य हैं।
विभिन्न मांगों को पूरा करवाने के लिए निकले हैं बाइक सवार
युवा कांग्रेस के सदस्य तिब्बती बच्चों को औपनिवेशिक स्कूलों में दाखिल करने, तिब्बती भाषा और परंपरा को मिटाने के प्रयास और शिक्षकों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि तिब्बत की अपनी स्वतंत्र संस्कृति है, उसे बचाना चाहिए। जब तक तिब्बत आजाद देश नहीं हो जाता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। 1959 में चीन के कब्जे के बाद भारत-तिब्बत सीमा के शांतिपूर्ण संबंध समाप्त हो गए। चीनी विकास परियोजनाओं ने भारत की सुरक्षा और संप्रभुता को चुनौती दी है। तिब्बती युवा कांग्रेस ने भारत सरकार से तिब्बत की स्वतंत्र स्थिति का समर्थन करने और ऐतिहासिक भारत-तिब्बत सीमा को मान्यता देने की अपील की है।
भारतीय जनता का समर्थन हासिल करना है उद्देश्य
बाइक रैली के दौरान भारत के विभिन्न शहरों और तिब्बती शीतकालीन बाजारों का दौरा किया जाएगा। इसका उद्देश्य चीन के दमनकारी शासन के खिलाफ भारतीय जनता की एकजुटता को प्रोत्साहित करना और तिब्बतियों के सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाना है।