जिले की रेवदर विधानसभा के अंतर्गत देवराजीफली गांव के लोग श्मशान घाट की समस्या को लेकर अब तक समाधान की बाट जोह रहे हैं लेकिन सालों बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। बारिश के दिनों में लोगों को पानी के तेज बहाव के बीच अर्थी को श्मशान तक ले जाना पड़ता है।
राज्य सरकार चाहे विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे कर ले लेकिन आज भी कई गांवों के लिए विकास के बारे में सोचना एक सपने के समान है। सिरोही जिले के आबूरोड उपखंड में रेवदर विधानसभा अंतर्गत आ रही ग्राम पंचायत के देवराजीफली के लोग सालों से अपनी मांग पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन न तो जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इनकी बात सुनी जा रही है और न ही जनप्रतिनिधियों का इनसे कोई सरोकार है। आलम यह है कि जीते जी तो ये लोग परेशान हैं ही लेकिन मरने के बाद अंतिम यात्रा के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोग पानी के तेज बहाव में जान जोखिम में डालकर अपने मृतक परिजन को श्मशान घाट तक पहुंचाने को मजबूर हैं।
रविवार को गांव में हुई एक व्यक्ति की मौत के बाद परिजनों एवं ग्रामीणों को पानी के तेज बहाव से होकर अर्थी को श्माशान घाट तक पहुंचाना पड़ा। ग्रामीणों ने कंधे पर अर्थी लेकर न केवल अपनी जान जोखिम में डाली बल्कि विकास के तमाम दावों की भी पोल खोली। गौरतलब है कि देवराजीफली में गरासिया समाज के 100 से ज्यादा घरों की आबादी निवास कर रही है। यहां प्राकृतिक बहाव के नाले के दूसरी तरफ समाज का श्मशान घाट बना है। बारिश के दौरान इस नाले में पानी का काफी तेज बहाव होता है। ऐसे में इसे पार करना हादसों को खुला न्यौता देना होता है। ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से ग्राम पंचायत प्रशासन से इस समस्या का समाधान करवाने की मांग की जा रही है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि हर बार, हर चुनाव में वोट मांगने आने वाले नेताओं को जब इस बारे में बताया जाता है तो वे भी आश्वासन देकर चले जाते हैं।
मामले में आबूरोड पंचायत समिति प्रधान लीलाराम गरासिया का कहना है कि हालांकि उन्हें इस समस्या की जानकारी नहीं है, फिर भी ग्राम पंचायत समिति के माध्यम से प्रस्ताव पंचायत समिति को भिजवाकर जल्द से जल्द इसका समाधान करवा देंगे। चनार ग्राम पंचायत वीडीओ अशोक सिंह के अनुसार यह सही बात है कि इस नाले में वर्तमान में पानी चल रहा है। जिला परिषद द्वारा इस कार्य को तो स्वीकृत कर दिया गया है लेकिन अभी तक बजट नहीं दिया गया है।