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Sirohi: देलवाड़ा जैन मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर बनाने की मांग, राज्यसभा में नीरज डांगी ने रखा प्रस्ताव

Tue, 03 Feb 2026 05:32 PM IST
सिरोही ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही

सांसद नीरज डांगी ने मंगलवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान माउंटआबू के देलवाड़ा जैन मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने राज्य सरकार से यहां के विभिन्न दर्शनीय और धार्मिक स्थलों के संरक्षण, संवर्धन और विकास की प्रक्रिया को शीघ्र प्रारंभ करने का आग्रह किया।

मंदिरों का ऐतिहासिक महत्व
सांसद डांगी ने सदन में माउंटआबू की अरावली पर्वत श्रृंखला की उच्चतम चोटी गुरुशिखर में स्थित देलवाड़ा जैन मंदिरों के इतिहास और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये मंदिर भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला, अद्वितीय संगमरमर शिल्पकला और सांस्कृतिक उत्कृष्टता के अद्वितीय उदाहरण हैं। देवालयों का निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के मध्य हुआ था। यहां कुल पांच श्वेताम्बर जैन मंदिर हैं, जिनमें विमलवसहि और लूणवसहि मंदिर विशेष कलात्मक एवं ऐतिहासिक महत्व रखते हैं। इसके अलावा महावीर स्वामी मंदिर, पीतलहर मंदिर और पार्श्वनाथ मंदिर प्रमुख हैं।

मंदिरों की शिल्पकला और संरचना
सांसद डांगी ने बताया कि मंदिर परिसर में उपलब्ध शिलालेखों के अनुसार वर्ष 1031 ईस्वी में 1500 शिल्पियों और 1200 श्रमिकों के अथक प्रयास से 18.53 करोड़ रुपए की लागत से ये मंदिर बनकर तैयार हुए। मंदिरों की छत, गुंबद, तोरणद्वार और शिलालेखों की अलंकृत नक्काशी पर्यटकों और श्रद्धालुओं को देश-विदेश से आकर्षित करती है। मंदिरों में जैन तीर्थंकरों की 57 देहरियां स्थित हैं। इनमें भगवान ऋषभदेव, मां सरस्वती, लक्ष्मीजी, अंबाजी, नृसिंह अवतार के हिरण्यकश्यप वध, श्रीकृष्ण द्वारा कालिया दमन और शेषनाग की शैय्या की मूर्तियां शामिल हैं। मंदिर परिसर में जैन संस्कृति के साथ-साथ उस युग की हिन्दू संस्कृति, नृत्य-नाट्य कला और अद्भुत शिल्प-चित्र अंकित हैं।

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'देलवाड़ा जैन मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं'
सांसद डांगी ने कहा कि मंदिरों की शिल्प-सौंदर्य की सूक्ष्मता, गुंबदों पर झूमते कलात्मक पिंड, मेहराबों का बारीक अलंकरण और शिलापट्टों पर पशु-पक्षियों, वृक्षों और पुष्पों की आकृतियों की नक्काशी अद्वितीय है। यह वास्तुकला और शिल्पकला विश्व में अन्यत्र नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि देलवाड़ा जैन मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं हैं, बल्कि यह भारत की बहुलतावादी संस्कृति, अहिंसा, सहिष्णुता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के प्रतीक भी हैं। सांसद ने सरकार से अनुरोध किया कि मंदिरों के संरक्षण, संवर्धन और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए।

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