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Sawai Madhopur: रणथंभौर में प्रदेश का पहला टाइगर रिजर्व वेटेनरी हॉस्पिटल तैयार; उपचार समेत ये प्रक्रिया तेज

Wed, 18 Mar 2026 11:24 AM IST
सवाई ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर

सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व ने एक और उपलब्धि हासिल की है। बाघों के संरक्षण के लिए विश्व स्तर पर पहचान रखने वाले इस टाइगर रिजर्व में अब प्रदेश का पहला टाइगर रिजर्व वेटेनरी हॉस्पिटल तैयार हो गया है। इस अस्पताल में बाघों सहित अन्य वन्यजीवों को विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। रणथंभौर अपने स्वच्छंद विचरण करते बाघों और वन्यजीवों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है, जिसके चलते यहां सालभर पर्यटकों की भीड़ रहती है। अब तक यहां बीमार वन्यजीवों का इलाज सीमित संसाधनों और एक वेटेनरी डॉक्टर के भरोसे होता था, लेकिन नए अस्पताल के शुरू होने से उपचार व्यवस्था में बड़ा सुधार होगा। वन विभाग के अनुसार, जोन नंबर-6 में राजबाग वन चौकी के पास करीब 30 लाख रुपये की लागत से इस अस्पताल भवन का निर्माण किया गया है। इसका निर्माण एनटीसीए और वेटेनरी काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रोटोकॉल के तहत किया गया है। अस्पताल में एक अत्याधुनिक लैब भी स्थापित की जाएगी, जहां वन्यजीवों की जांच और फोरेंसिक परीक्षण किए जा सकेंगे। पहले वन्यजीवों के सैंपल जांच के लिए इंडियन वेटेनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट भेजे जाते थे, जिनकी रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते थे। अब जांच रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही, पोस्टमार्टम के दौरान उभरती बीमारियों (इमर्जिंग डिजीज) का भी पता लगाया जा सकेगा। रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि हाल ही में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में रणथंभौर के लिए करीब साढ़े चार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि से अस्पताल को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक मशीनों और सुविधाओं से लैस किया जाएगा। करीब एक हजार वर्गगज क्षेत्र में बने इस अस्पताल में दो अलग-अलग एनक्लोजर (बाड़े) तैयार किए गए हैं, जहां बाघों और अन्य वन्यजीवों को उपचार के दौरान रखा जा सकेगा। पहले घायल या बीमार बाघों को ट्रैंकुलाइज कर इलाज के बाद जंगल में छोड़ना पड़ता था, जिससे बार-बार बेहोश करने का जोखिम बना रहता था। अब अस्पताल में बिना ट्रैंकुलाइज किए भी उपचार और निगरानी संभव होगी।

ये भी पढ़ें- Rajasthan Politics:  सीएम भजनलाल का अशोक गहलोत पर तीखा हमला, जानें क्यों किया होटल राजनीति का जिक्र? अस्पताल में एक्स-रे मशीन, ट्रीटमेंट यूनिट, पोस्टमार्टम कक्ष, वेटेनरी डॉक्टर कक्ष, छोटे वन्यजीवों के लिए पिंजरे सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके शुरू होने से बाघ, तेंदुआ, भालू सहित सभी छोटे-बड़े वन्यजीवों का बेहतर और त्वरित इलाज संभव होगा। वन विभाग का मानना है कि यह वेटेनरी हॉस्पिटल रणथंभौर के वन्यजीव संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा, खासकर उन मामलों में जहां बाघ आपसी संघर्ष में घायल हो जाते हैं या गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं।

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