जालोर, पशुपालन विभाग और जे.के. ट्रस्ट बॉम्बे के बीच हुए अनुबंध के तहत कार्यरत करीब दो हजार ए.आई. टेक्नीशियनों ने पिछले 6 वर्षों से वेतन नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग जालोर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2016-17 से जुलाई 2025 तक राज्यभर में कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों पर कार्य करने वाले टेक्नीशियन को एक भी भुगतान नहीं किया गया है।
ज्ञापन के अनुसार जब इस संबंध में जे.के. ट्रस्ट के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने भुगतान न होने का कारण सरकार से राशि प्राप्त न होना बताया, लेकिन बाद में यह जानकारी मिली कि पशुपालन विभाग, जालोर द्वारा जे.के. ट्रस्ट को करीब 1.70 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। इसके बावजूद, ट्रस्ट ने ए.आई. टेक्नीशियनों को गुमराह किया और अब स्पष्ट रूप से कह दिया कि उन्हें कोई पैसा नहीं मिलेगा।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि टेक्नीशियनों ने केवल कृत्रिम गर्भाधान ही नहीं, बल्कि लंपी जैसी गंभीर बीमारियों में भी सरकार के साथ मिलकर सहयोग किया। इसके बावजूद उन्हें उनका मेहनताना नहीं दिया गया। टेक्नीशियनों ने मांग की कि हरियाणा मॉडल की तरह राजस्थान में भी जे.के. ट्रस्ट की शेष राशि रोक कर, पूर्ण भुगतान की शर्त पर ही ट्रस्ट को भुगतान किया जाए, जैसा हरियाणा सरकार ने वर्ष 2011–2016 के अनुबंध में किया था। टेक्नीशियनों ने संयुक्त निदेशक से मांग की है कि उनकी शीघ्र सुनवाई हो, बकाया राशि दिलवाई जाए और ट्रस्ट के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।