फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भीनमाल की घोटा गैर: जब ‘बाबैया ढोल’ की एक थाप पर थिरक उठता है पूरा शहर

Sat, 28 Feb 2026 07:21 AM IST
जालौर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालोर

राजस्थान के जालोर शहर में होली के दूसरे दिन आयोजित होने वाली घोटा गैर एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के रूप में जानी जाती है। शहर के बड़े चौहटे पर खेले जाने वाली यह गैर केवल एक नृत्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि परंपरा, सामूहिक उत्साह और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

घोटा गैर की शुरुआत पारंपरिक रूप से से होती है। यहां से बाबैया ढोल की गूंज के साथ गैर रवाना होती है, जो सात निंबड़ी, खारी रोड, देतरियों का चौहटा, गणेश चौक होते हुए बड़े चौहटे तक पहुंचती है। पुराने समय से यही मार्ग निर्धारित है और आज भी उसी क्रम का पालन किया जाता है। ढोल जैसे ही मंदिर से निकलता है, खारी रोड पर भारी भीड़ उमड़ पड़ती है।

घोटा गैर की सबसे बड़ी विशेषता है 'बाबैया ढोल'। स्थानीय जाकोब तालाब क्षेत्र में रहने वाले मीर समाज के लोग पिछले करीब 62 वर्षों से इस ढोल को बजा रहे हैं। मान्यता है कि सैकड़ों वर्ष पुराने इस ढोल को ठाकुरों द्वारा मीर समाज को सौंपा गया था। यह ढोल वर्ष में केवल होली पर ही बाहर निकाला जाता है। इसकी ध्वनि इतनी विशिष्ट और प्रभावशाली होती है कि लोग स्वतः ही नृत्य के लिए आकर्षित हो जाते हैं। पहले इसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती थी।

ये भी पढ़ें: जालोर में एमडी फैक्ट्री का भंडाफोड़, 50 किलो ड्रग्स बनाने लायक 400 लीटर केमिकल बरामद

घोटा गैर में बड़ी संख्या में युवा और बुजुर्ग हाथों में लठ लेकर ढोल की थाप पर जोश और उमंग के साथ नृत्य करते हैं। दिनभर विभिन्न समाजों और गणमान्य लोगों के यहां ढोल ले जाकर ‘करबा पीने’ की रस्म भी निभाई जाती है। शाम तक गैर शहर के प्रमुख चौहटों से होती हुई घंटाघर पहुंचती है और उसके चारों ओर चक्कर लगाए जाते हैं।

 

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें