दौसा जिले में तैनात एक महिला डॉक्टर ज्योति मीणा की डेंगू बीमारी के चलते मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पिछले तीन दिन से डॉ. ज्योति मीणा डेंगू से ग्रसित थीं। डॉक्टर की मौत ने एक बार फिर साफ-सफाई के सरकारी दावों की पोल खोल दी है। सरकारी दावे धरे रह गए और एक डॉक्टर की डेंगू के चलते जान चली गई। मामला दौसा जिले के रामगढ़ पचवारा उप जिला अस्पताल का है। यहां डॉक्टर ज्योति मीणा चिकित्सक के रूप में लगभग एक साल से अपनी सेवाएं दे रही थीं। एक दिन पहले अचानक डॉक्टर ज्योति की तबीयत बिगड़ी, जिसके चलते उसे तुरंत जयपुर के निजी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया।
लालसोट भी सीएमओ डॉक्टर पवन जैन ने बताया कि बीते दो दिन पहले डॉक्टर ज्योति मीणा इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती हुई थीं। वहां इलाज के दौरान उसकी प्लेटलेट्स गिरती चली गईं। बीते कल मात्र 12 हजार प्लेटलेट्स की रह गईं। इसके बाद डॉक्टर ज्योति को तुरंत आईसीयू में शिफ्ट किया गया। आईसीयू में जाने के बाद भी ज्योति मीणा की तबीयत में लगातार गिरावट बनी रही। दोपहर डॉक्टर ज्योति मीणा की डेंगू के चलते मौत हो गई।
डॉ. ज्योति मीणा के एक डेढ़ साल की बेटी है। पति डॉ. धर्म सिंह मीणा भी उप जिला अस्पताल रामगढ़ पचवारा में ENT स्पेशलिस्ट हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि हाल ही में कुछ दिनों पूर्व डॉक्टर ज्योति मीणा की डेढ़ साल की बेटी भी डेंगू से पीड़ित थी, लेकिन उसके रिकवर होते ही मां चपेट में आ गई और डेंगू से रिकवर नहीं हो पाईं। उधर, डॉक्टर ज्योति मीणा के निधन से पूरे चिकित्सा महकमें में हड़कंप मच गया और शोक की लहर दौड़ पड़ी। अब बड़ा सवाल ये भी है कि जब मौसमी बीमारियों का बोलबाला है। ऐसे में निश्चित रूप से डेंगू बड़ी खतरनाक बीमारी है, जो शरीर में सबसे पहले प्लेट्स की संख्या को कम करती है और धीरे-धीरे शरीर को मौत की तरफ खींचती है। सरकारी दावे भी यहां फेल हो गए, जब एक डॉ. की जान डेंगू पॉजिटिव होने की वजह से चली गई।