राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष व वरिष्ठ भाजपा नेता वासुदेव देवनानी ने रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयान पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वे स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का कार्यकर्ता मानते हैं और उन्हें इस पर गर्व है। साथ ही उन्होंने गहलोत पर तंज कसते हुए कहा कि आरएसएस की वास्तविकता को समझने के लिए गहलोत को एक जन्म और लेना पड़ेगा।
देवनानी रविवार को अपने एक दिवसीय दौरे पर भीलवाड़ा पहुंचे थे, जहां वे हरिशेवा उदासीन आश्रम के वार्षिकोत्सव में शामिल हुए। इससे पहले भीलवाड़ा सर्किट हाउस में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। मौके पर सांसद दामोदर अग्रवाल, कलेक्टर जसमीत सिंह संधू, एसपी धर्मेन्द्र सिंह यादव और भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा ने उनका स्वागत किया।
मीडिया से बातचीत में देवनानी ने गहलोत के उस बयान का जवाब दिया जिसमें गहलोत ने कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष आरएसएस कार्यकर्ता हैं और मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल हैं। इस पर देवनानी ने कहा, "हां, मैं आरएसएस का कार्यकर्ता हूं, और यह मेरे लिए गर्व की बात है। लेकिन गहलोत को संघ की कोई समझ नहीं है। उन्हें संघ की शाखा में जाकर साल-दो साल घिसाई करानी चाहिए, तब जाकर संघ के संस्कार समझ आएंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "जो बातें गहलोत कर रहे हैं, वो अपने दल में करें। भाजपा में संगठन और विधानसभा मिलकर निर्णय लेते हैं। संघ एक राष्ट्रभक्त और संस्कारित संगठन है, जो चरित्रवान व्यक्तित्व तैयार करता है। मैं उन्हीं संस्कारों से जीवन में आगे बढ़ा हूं।" देवनानी ने गहलोत के बयानों को लेकर कहा कि अब न तो कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व और न ही प्रदेश संगठन उन्हें गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने कहा, "गहलोत की भाषा और उनके बयान अब महत्वहीन हो गए हैं। मैं भी उन्हें अब कोई महत्व नहीं देता।"
भाजपा नेता ने भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक जयकृष्ण पटेल के खिलाफ रिश्वत लेने के आरोपों को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने बताया कि मामला सदाचार समिति को सौंपा गया है और रिपोर्ट विधानसभा में प्रस्तुत की जाएगी। यदि पटेल को तीन साल से अधिक की सजा होती है तो उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाएगी, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों में कहा गया है।
वहीं, गहलोत के इस आरोप पर कि जब वे मुख्यमंत्री थे तब भी उन्होंने इस तरह की कार्रवाई नहीं की, देवनानी ने बिना नाम लिए कहा कि विधानसभा में अनुशासन और प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है, और सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री पद को लेकर गहलोत द्वारा देवनानी का नाम लिए जाने पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर इस पर कुछ नहीं कहा, लेकिन इतना जरूर स्पष्ट किया कि भाजपा में निर्णय संगठन करता है, न कि अटकलों के आधार पर।