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Rajasthan News: 'हमारा घर मत तोड़ो', जेसीबी के सामने डटीं बेटियां, बाड़मेर में हाई वोल्टेज ड्रामा

Thu, 25 Jun 2026 09:49 AM IST
बाड़मेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर

राजस्थान के बाड़मेर जिले में प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के दौरान उस समय भावुक और तनावपूर्ण माहौल बन गया, जब अपने घर को बचाने के लिए परिवार की बेटियां जेसीबी के सामने डट गईं। सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम को लोगों के विरोध का सामना भी करना पड़ा। अतिक्रमण हटाने पहुंचा प्रशासन बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित बाड़मेर ग्रामीण पंचायत क्षेत्र में सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान कच्चे-पक्के निर्माण, झोपड़ियां और अन्य अवैध ढांचों को ध्वस्त किया गया। प्रशासन की ओर से जेसीबी मशीनों की मदद से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया। घर बचाने छत पर चढ़ीं बेटियां कार्रवाई के दौरान अपने घर को बचाने के लिए परिवार की दो-तीन बेटियां ईंटों से बने कमरे की छत पर चढ़कर बैठ गईं। लड़कियों का प्रयास था कि प्रशासन उनके घर पर बुलडोजर न चलाए और उनका आशियाना बच जाए। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वे लंबे समय तक छत पर डटी रहीं। पुलिस से भिड़ी युवती इसी दौरान एक अन्य युवती अपनी झोपड़ी को बचाने के लिए पुलिसकर्मियों से उलझती नजर आई। वह बार-बार झोपड़ी के अंदर जाने की कोशिश कर रही थी ताकि जेसीबी मशीन उसकी झोपड़ी को नहीं तोड़ सके। महिला पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़कर बाहर निकाला, लेकिन इसके बावजूद वह लगातार विरोध करती रही और अपने घर को बचाने के लिए संघर्ष करती दिखाई दी। तहसीलदार और सरपंच प्रतिनिधि में बहस अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान बाड़मेर ग्रामीण तहसीलदार हुकुमचंद और बाड़मेर ग्रामीण सरपंच प्रतिनिधि खेराजराम प्रजापत के बीच भी तीखी बहस हो गई। दोनों के बीच हुई नोकझोंक के चलते मौके का माहौल कुछ समय के लिए गर्मा गया। महिला बोली- घर में कमाने वाला कोई नहीं कार्रवाई के दौरान एक महिला ने बताया कि उसके परिवार में कमाने वाला कोई पुरुष नहीं है और केवल बेटियां ही हैं। महिला ने कहा कि उनकी बेटियां घर को बचाने के लिए छत पर चढ़ी थीं। उन्होंने प्रशासन और सरकार से मदद की मांग करते हुए कहा कि उनके पास अपनी जमीन नहीं है और वे बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे हैं। 40 साल से रह रहे परिवार का दावा वहीं स्थानीय एक व्यक्ति ने बताया कि वह पिछले 40 वर्षों से इसी स्थान पर रह रहा है। उसका कहना है कि करीब दो से ढाई साल पहले उसने ईंटों से एक कमरा बनवाया था। अब प्रशासन की कार्रवाई में उसका घर भी टूट गया है, जिससे परिवार के सामने संकट खड़ा हो गया है। कार्रवाई के दौरान बना रहा तनावपूर्ण माहौल अतिक्रमण हटाने की पूरी कार्रवाई के दौरान प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही। हालांकि प्रशासन ने सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई जारी रखी, जबकि प्रभावित परिवार अपने आशियाने को बचाने के लिए आखिरी समय तक संघर्ष करते नजर आए।

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