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Ajmer News: मुहर्रम पर नंगी तलवारों से खेला गया 'हाईदौस', 900 साल पुरानी परंपरा के साथ इमाम हुसैन को याद किया

Fri, 26 Jun 2026 03:55 PM IST
अजमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

देशभर में मुस्लिम समुदाय ने हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मुहर्रम का अशूरा गम और अकीदत के साथ मनाया। वहीं ख्वाजा गरीब नवाज की नगरी अजमेर में 800–900 साल पुरानी ऐतिहासिक परंपरा 'हाईदौस' ने एक बार फिर कर्बला की जंग का जीवंत दृश्य प्रस्तुत किया। अजमेर के अंदरकोट क्षेत्र में दी पंचायत अन्दरकोटियान के नेतृत्व में डोले शरीफ के जुलूस के दौरान सैकड़ों लोगों ने नंगी तलवारों से हाईदौस खेलकर हजरत इमाम हुसैन के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और अकीदत पेश की।
इस परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि समूचे एशिया में तलवारों से खेले जाने वाले हाईदौस की परंपरा केवल दो स्थानों पर ही निभाई जाती है- एक अजमेर और दूसरा पाकिस्तान के हैदराबाद शहर में। माना जाता है कि यह परंपरा करीब 800 से 900 वर्षों से अजमेर में लगातार निभाई जा रही है और आज भी पूरे उत्साह, अनुशासन और धार्मिक आस्था के साथ जारी है।

पुलिस प्रशासन स्वयं उपलब्ध कराता है तलवारें
इस अनूठी परंपरा में अजमेर पुलिस प्रशासन स्वयं करीब 100 तलवारें उपलब्ध करवाता है, जिनसे हाईदौस खेला जाता है। इस दौरान कई प्रतिभागी तलवारों की चोट से घायल भी हो जाते हैं लेकिन कोई भी इसे लेकर शिकायत या मुकदमा दर्ज नहीं कराता। घायल होने वाले लोग इसे अपनी खुशकिस्मती और इमाम हुसैन की राह में मिली नेमत मानते हैं।

कर्बला की शहादत को किया याद
मुहर्रम का अशूरा इस्लामिक इतिहास का वह दिन है जब कर्बला के मैदान में इस्लाम की रक्षा करते हुए हजरत इमाम हुसैन और उनके सैकड़ों साथियों ने शहादत दी थी। उसी बलिदान की याद में अजमेर में हाईदौस खेला जाता है। तलवारें थामे प्रतिभागी इस भावना के साथ मैदान में उतरते हैं कि यदि वे कर्बला के समय मौजूद होते, तो इमाम हुसैन से पहले अपनी जान कुर्बान कर देते।

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सिर्फ अन्दरकोटियान पंचायत समाज निभाता है यह परंपरा
हाईदौस खेलने की यह ऐतिहासिक परंपरा केवल अन्दरकोटियान पंचायत समाज के लोग निभाते हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि तलवारों से चोट लगने के बावजूद कोई भी मन में वैर-भाव नहीं रखता और न ही पुलिस में शिकायत करता है। सभी इसे धार्मिक आस्था और इमाम हुसैन के प्रति प्रेम का प्रतीक मानते हैं।

तोपों की गर्जना से हुई शुरुआत, छतों से देखते रहे लोग
परंपरा के अनुसार तोपों की गर्जना के साथ हाईदौस की शुरुआत हुई। ढोल और ताशों की मातमी धुनों के बीच सैकड़ों लोग हाथों में चमचमाती तलवारें लेकर डोले शरीफ की सवारी के साथ निकले। हाईदौस देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े, जबकि कई लोगों ने अपने घरों की छतों से इस ऐतिहासिक आयोजन का नजारा देखा।

सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
मुहर्रम और हाईदौस के आयोजन को देखते हुए जिला पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरे समय मौके पर मौजूद रहे और आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

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