शहर के माईजीना एरिया में उस समय सहम का माहौल बन गया जब नगर कौंसिल अधिकारी जेल में बद दंपति के अवैध रूप से बनाए महल नुमा घर को गिराने के लिये पीले पंजे लेकर गली में पहुंची इस से पहले पुलिस ने पूरे एरिया को पुलिस छावनी में बदल दिया था जिसके बाद नगर कौंसिल अधिकारियों ने पुलिस की मदद से अवैध निर्माण को गिराया। नगर कौंसिल अधिकारी सुखदेव सिंह रंधावा के अनुसार, इंदरजीत कौर ने अवैध तरीके से जमीन पर कब्जा कर महल जैसा घर बना लिया था।कौंसिल ने पहले मालिकों को नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे थे। दस्तावेज नहीं मिलने पर कार्रवाई की गई। एसएसपी डॉ. अकुर गुप्ता ने बताया कि घर के मालिक हरप्रीत सिंह हैप्पी लोगा और उनकी पत्नी इंदरजीत कौर इंदू नशा तस्करी के मामलों में जेल में बंद हैं। दोनों पर थाना सिटी में कई मामले दर्ज है। कौंसिल की कार्रवाई का पता चलते ही इंदरजीत कौर के वकील राजविंदर सिंह राजा मौके पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से बात करनी चाही लेकिन अधिकाकियों ने उनकी एक ना सुनी। एडवोकेट राजविंदर सिंह ने बताया कि इस घर को लेकर जगराओं कोर्ट नंबर चार में स्टे ऑर्डर के लिए केस दायर किया गया था। जज साहिब ने अगली सुनवाई 4 जुलाई को निर्धारित थी। उन्होंने कहा कि नगर कौंसिल को 11 जून को नोटिस भेजा गया था। जिसको ई ओ सुखदेव सिंह रंधवा ने रिसिव भी कर लिया था इस के बावजूद कौंसिल ने जानबूझ कर सुनवाई से पहले घर धवस्त कर दिया। कौंसिल कोर्ट में सुनवाई के बाद भी कार्रवाई कर सकती थी। वकील ने कौंसिल पर कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब घर का निर्माण हो रहा था, तब कौंसिल ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। क्योकि घर एक दिन में नही बना। उन्होंने कहा कि घर काफी साल पहले बना था लेकिन अब कौंसिल अधिकारियों को अवैध निर्माण की याद आई। इस के पीछे बड़ा खेल खेला गया है। वही कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पूरे एरिया को सील कर दिया था। कौंसिल कार्रवाई फिर सवालों के घेर में फसती नजर आई। जब मीडिया ने शहर में अन्य अवैध निर्माणो पर कार्रवाई सबंधी सवाल किया। तो ई ओ रंधावा ने यह कह पल्ला झाड़ लिया कि धीरे धीरे करेगे। वही कौंसिल प्रधान जतिंदरपाल राना के मुताबिक सब्जी मंडी रोड पर कौंसिल के 4.5 एकड़ जमीन के अलावा कई अवैध कब्जे है। जिनको छुडवा कर कौंसिल अपना कूडा वहा फेंक सकती है। लेकिन ई ओ उस जमीन पर हुए अवैध कब्जे क्यों नही छुडवा रहा यह समझ से बाहर है। बता दे शहर में आठ छप्पड़ हुआ करते थे। जिन पर कौंसिल अधिकारियों की नजरों के सामने धीरे धीरे कब्जे होते चले गए। इतना ही नही अवैध कब्जाधारियों को पानी सीवरेज कनेक्शन तक दिये गए जहां तक कि बिजली के मीटर तक लग गए