अदालतों में मुकद्दमों का बोझ करने के उद्देश्य से फगवाड़ा कोर्ट कांपलैक्स में लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान ज्यूडीशियल मैजिस्ट्रेट गुरप्रीत कौर और हर्षबीर के अलावा मैंबर्स एडवोकेट अंकित ढींगरा, जतिंदर ठाकुर, रजनी बाला तथा सोनिका हांडा ने हजारों केसों का मौके पर ही दोनों पक्षों की आपसी सहमती से निपटारा करवाया। बार एसोसिएशन फगवाड़ा के अध्यक्ष एडवोकेट रविंदर शर्मा नीटा तथा एडवोकेट अंकित ढींगरा ने बताया कि लोक अदालतें वह मंच होता है जहां विवादों को दोनों पक्षों की आपसी सहमति से निपटाया जाता है। लोक अदालत को विवादों के निपटारे का वैकल्पिक साधन कहा जा सकता है। जिसमें आमतौर पर संपत्ति अधिग्रहण, वित्तीय विवाद, और वैवाहिक मुद्दों जैसे पारिवारिक विवादों का निपटारा किया जाता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में किसी पक्ष को सजा नहीं होती। विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाता है। लोक अदालत के फैसले के अनुसार मुआवजा और हर्जाना भी तुरंत अदा होता है। खास बात यह है कि लोक अदालत के फैसलों के खिलाफ किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती। लोक अदालत में समझौते के जरिए निपटाए गए मामले में कोर्ट फीस भी लौटा दी जाती है।