जान की परवाह किए बिना रेल डिवीजन फिरोजपुर की एक पैसेंजर ट्रेन और पेट्रोल टैंकरों से भरी एक मालगाड़ी को आग लगने से बचाने वाले सुरजीत सिंह आज अपने हक के लिए अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के चक्कर काट रहे हैं। आग बुझाने के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके इलाज पर करीब 15 लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन उन्हें अभी तक रेलवे या पंजाब सरकार की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिला है। सुरजीत सिंह ने बताया कि पैसेंजर ट्रेन में लगी आग बुझाते समय उन्हें गंभीर चोटें आईं। इसके बाद उनकी शारीरिक स्थिति काफी खराब हो गई और अब वह विकलांगता के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से वह इलाज पर हुए खर्च और उचित मुआवजे के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सहायता नहीं मिली। सुरजीत की मुख्य मांग है कि उनके इलाज पर आया खर्च सरकार द्वारा दिया जाए और उनके बेटे को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से उन्हें एक पत्र मिला है, जिसमें 26 जनवरी 2027 को सम्मानित किए जाने की जानकारी दी गई है। सुरजीत ने सरकार से जल्द उनकी मांगों पर विचार कर न्याय देने की अपील की है।