राज्य की राजनीति में पारिवारिक रिश्ते अक्सर दिलचस्प मोड़ लेते हैं। कई बार एक ही घर के सदस्य अलग-अलग राजनीतिक दलों में शामिल हो जाते हैं। टिकट की दौड़, राजनीतिक महत्वाकांक्षा और बदलते समीकरण इसके मुख्य कारण हैं। इसी वजह से पंजाब के कई राजनीतिक परिवार अलग-अलग खेमों में बंट गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भाई मनोहर सिंह ने 2022 में कांग्रेस से टिकट न मिलने पर बस्सी पठाना से निर्दलीय चुनाव लड़ा। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा और उनके भाई फतेह जंग सिंह बाजवा भी इसका उदाहरण हैं। प्रताप बाजवा कांग्रेस में विपक्ष के नेता बने रहे जबकि फतेह जंग ने भाजपा का दामन थामा।