फिरोजपुर और पाकिस्तान के बीच रेल पटरी बिछी हुई थी, जिसे अंग्रेजों ने अपने शासनकाल में बनाया था। सतलुज दरिया के बीच लगभग 23 पिलर खड़े कर उनके ऊपर डबल पुल बनाया गया था, जिसे केसरी-ए-हिंद नाम दिया गया। यह पुल उस समय एक महत्वपूर्ण रेलवे लिंक था, जो भारत और पाकिस्तान को जोड़ता था। भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 और 1971 के युद्ध के दौरान हुई गोलाबारी में यह पुल टूट गया, हालांकि इसके पिलर आज भी मौजूद हैं और ऐतिहासिक दृष्टि से इसकी याद दिलाते हैं। उस समय जब ट्रेन भारत से पाकिस्तान जाती थी, तो पुल के दोनों किनारों पर बनी इमारतों में लोहे के गेट लगे होते थे। इन गेटों को खोलने के बाद ही ट्रेन पाकिस्तान की ओर रवाना होती थी। इसी तरह, पाकिस्तान से भारत में आने वाली ट्रेनों के लिए भी इसी प्रक्रिया का पालन किया जाता था। 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी फौज ने इस रेल ट्रैक को उखाड़ कर अपने साथ ले गई थी। वर्तमान में यह रेल ट्रैक केवल हुसैनीवाला बॉर्डर तक ही मौजूद है। रेल प्रशासन ने इस ट्रैक को संभाल कर रखा है और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए साल में 13 अप्रैल और 23 मार्च (शहीदी दिवस) पर ट्रेन चलाई जाती है। इस ट्रेन में लोग बैठकर हुसैनीवाला बॉर्डर पर लगने वाले मेले को देखने आते हैं और शहीदों की याद में श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।