पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने तीन सदस्यीय पर्यवेक्षक समिति को जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन दिल्ली में चल रही बैठकों से मतभेद और खुलकर सामने आ गए हैं। विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की नब्ज टटोलने और नेताओं के बीच तालमेल बढ़ाने की कवायद फिलहाल सफल होती नहीं दिख रही। हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के 66 नेताओं को दिल्ली बुलाकर उनसे वन-टू-वन बातचीत की है। बैठकों का उद्देश्य संगठन की स्थिति का आकलन करना और चुनावी रणनीति तैयार करना है। हालांकि नेताओं ने पर्यवेक्षकों के सामने अलग-अलग राय रखकर गुटबाजी की तस्वीर और स्पष्ट कर दी है।सूत्रों के अनुसार कई नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व का समर्थन किया, जबकि कुछ नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव के लिए बेहतर चेहरा बताया। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के पक्ष में भी कई नेताओं ने राय रखी। इससे किसी एक नाम पर सहमति बनने के बजाय मतभेद और उभरकर सामने आए हैं।