मानसून की बेरुखी ने चंडीगढ़ के गांवों के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश नहीं होने के कारण धान की रोपाई का काम प्रभावित हो रहा है। खेतों में नमी नहीं होने से किसान ट्यूबवेल के पानी से सिंचाई करने को मजबूर हैं, लेकिन इससे भी पूरी तरह राहत नहीं मिल पा रही है। किसानों का कहना है कि समय पर बारिश नहीं हुई तो धान की रोपाई में और देरी होगी, जिसका असर आने वाली कनक (गेहूं) की फसल पर भी पड़ेगा। गांव कैंबवाला के किसानों ने बताया कि धान की पनीरी तैयार हो चुकी है और अब उसे खेतों में लगाने का समय है, लेकिन बारिश के अभाव में खेतों की स्थिति रोपाई के अनुकूल नहीं बन पा रही है। किसानों का कहना है कि धान की फसल के लिए खेतों में पर्याप्त पानी और नमी की जरूरत होती है, जो इस समय प्राकृतिक बारिश से ही बेहतर तरीके से मिल सकती है। किसान दलीप कुमार, सोनू और गौरव चौधरी ने बताया कि पिछले दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेत सूखे पड़े हैं। ट्यूबवेल के जरिए सिंचाई की जा रही है, लेकिन इससे खेती का खर्च बढ़ रहा है। इसके अलावा ट्यूबवेल से खेत तैयार करने में अधिक समय लग रहा है, जिससे धान की रोपाई का काम पिछड़ रहा है। किसान गुरमीत सिंह और अन्य किसानों ने भी चिंता जताते हुए कहा कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो धान की पनीरी खराब होने का खतरा है। किसान पहले ही पनीरी तैयार करने में मेहनत और खर्च कर चुके हैं। ऐसे में समय पर रोपाई नहीं होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। खुड्डा लहौरा के किसान निर्मल सिंह ने बताया कि बारिश नहीं होने से धान की रोपाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि 12 एकड़ में धान की रोपाई करनी है। छह एकड़ में तो किसी तरह से लगा दिया। अब बारिश का इंतजार में हैं। खेत सूखे हैं। ट्यूबवेल से काम नहीं चल रहा है। देरी से धान की रोपाई होगी तो कनक की फसल भी देरी से लगेगी। किसानों के अनुसार धान की रोपाई में होने वाली देरी का असर सिर्फ इस फसल तक सीमित नहीं रहेगा। धान की कटाई देर से होने पर गेहूं (कनक) की बुवाई का समय भी आगे खिसक जाएगा। इससे गेहूं की पैदावार प्रभावित होने की आशंका रहती है।