अमृतसर के मकबूलपुरा इलाके में एक निजी अस्पताल में उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब एक गरीब परिवार को अपने बीमार बच्चे का इलाज सरकार द्वारा जारी 10 लाख रुपये के हेल्थ कार्ड पर कराने से मना कर दिया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने पहले 3500 रुपये फीस और अन्य खर्चों की मांग की, जबकि वे पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। परिवार के अनुसार, वे कई वर्षों से अपने बच्चे का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में करवा रहे हैं और इस बार उन्हें सरकार की योजना से राहत मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अस्पताल द्वारा इलाज से इनकार किए जाने से उनकी परेशानी और बढ़ गई। मामले की सूचना मिलते ही आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेता और पार्षद कमल कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के साथ तीखी बहस करते हुए आरोप लगाया कि कुछ निजी अस्पताल सरकारी योजनाओं को सही तरीके से लागू नहीं कर रहे हैं और गरीबों से पैसे वसूल रहे हैं। विवाद बढ़ने पर पूर्वी हलके की विधायक जीवनजोत कौर भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने इसे गलतफहमी का मामला बताते हुए कहा कि अस्पतालों को मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हर बीमारी का इलाज हर अस्पताल में संभव नहीं होता, ऐसे में मरीजों को उच्च केंद्रों पर रेफर करना पड़ता है। वहीं, अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. ऋषभ ने कहा कि मरीज की बीमारी योजना के तहत कवर नहीं थी, जिससे गलतफहमी पैदा हुई। उन्होंने बताया कि अब मरीज को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है और मामला आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है।