पीआरटीसी और पंजाब रोडवेज के कच्चे कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर अमृतसर में गेट रैलियां कर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि उनकी जायज मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। मीडिया से बातचीत में यूनियन नेताओं ने बताया कि 28 फरवरी की हड़ताल के दौरान वे किलोमीटर स्कीम के तहत चलाई जा रही निजी बसों का विरोध कर रहे थे। उनका कहना है कि सरकारी विभाग में निजी बसों को शामिल करना सरकारी ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को कमजोर करने के समान है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि 27 और 28 फरवरी की रात को सरकार की ओर से राज्य और डिपो स्तर के कई पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके विरोध में पंजाब के कई डिपो बंद हो गए थे। कर्मचारियों के अनुसार उनके कई साथियों पर धारा 307 समेत गंभीर मामले दर्ज कर करीब 20 कर्मचारियों को जेल भेज दिया गया था। यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार के साथ बैठक में आश्वासन दिया गया था कि हड़ताल समाप्त होने के 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर्मचारियों को रिहा कर दिया जाएगा और निलंबित कर्मचारियों को ड्यूटी पर वापस लिया जाएगा। लेकिन अब तक कई कर्मचारी जेल में बंद हैं और जो रिहा हुए हैं उन्हें भी ड्यूटी पर नहीं लगाया गया है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि ट्रांसपोर्ट सचिव के साथ होने वाली बैठक में कोई समाधान नहीं निकला तो 9 मार्च से पंजाब के 27 डिपो में चरणबद्ध तरीके से भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। साथ ही उन्होंने मांग की कि बर्खास्त कर्मचारियों को तुरंत बहाल किया जाए, आउटसोर्स और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमित किया जाए तथा किलोमीटर स्कीम के तहत चल रही निजी बसों को रद्द किया जाए।