संस्था 'लापता पंजाब' ने गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में दावा किया कि वर्ष 1984 से 1995 के दौरान पंजाब में कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों, मानवाधिकार उल्लंघनों और लावारिस बताकर अंतिम संस्कार किए गए लोगों से जुड़े नौ हजार से अधिक मामलों का दस्तावेजी रिकॉर्ड एकत्र किया जा चुका है। संस्था ने कहा कि इन मामलों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। संस्था के प्रतिनिधि एडवोकेट बलजिंदर सिंह बाजवा और सतनाम सिंह बैंस ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा के कार्य को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने वर्ष 2008 से विभिन्न जिलों में दस्तावेजी पड़ताल शुरू की। उनके अनुसार, वर्ष 2019 में 8,257 मामलों के आधार पर हाईकोर्ट में PIL दाखिल की गई थी और अब साक्ष्यों सहित मामलों की संख्या करीब 9 हजार तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा ने अमृतसर, पट्टी और तरनतारन के श्मशान घाटों से 2,097 लावारिस शवों का रिकॉर्ड जुटाया था तथा 25 हजार लावारिस शवों की आशंका जताई थी। संस्था का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई जांच हुई, लेकिन सीमित एफआईआर दर्ज की गईं और कई मामलों में आज तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। प्रेस वार्ता में संस्था ने आरोप लगाया कि कथित दोषी पुलिस अधिकारियों को दंडित करने के बजाय पदोन्नति दी गई। साथ ही गवाहों और पीड़ित परिवारों को डराने-धमकाने के भी आरोप लगाए। संस्था ने कांग्रेस, शिअद और आम आदमी पार्टी की सरकारों पर भी राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया। संस्था ने एसजीपीसी और अकाल तख्त की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए मांग की कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए अब तक किए गए प्रयासों को सार्वजनिक किया जाए।