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राजोआणा अपनी आन-शान और गैरत पर अडिग खड़े महान ‘जिंदा शहीद’ : धामी

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भाई बलवंत सिंह राजोआणा की हाल में सामने आई चिट्ठी को लेकर बड़ा बयान दिया है। धामी ने कहा कि उन्हें राजपुरा से राजोआणा का संदेश और चिट्ठी प्राप्त हुई है। उन्होंने राजोआणा को ‘महान जिंदा शहीद’ बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी आन, शान और गैरत से कभी समझौता नहीं किया और आज भी अपने फैसले पर अडिग खड़े हैं। धामी ने कहा कि राजोआणा ने शुरुआत से लेकर मुकदमे और मौत की सजा तक के सफर में अपनी कौमी भावना को कायम रखा। उन्होंने बताया कि एसजीपीसी पहले भी उन्हें पत्र लिख चुकी है और कमेटी की ओर से दायर की गई मर्सी पिटीशन वापस लेने की अपील की गई है, ताकि उनकी इच्छा का सम्मान किया जा सके। धामी ने कहा कि ऐसे सिख सूरबीर करोड़ों में कोई विरले ही होते हैं। वहीं, सिखों के आपस में लड़ने को धामी ने बड़ी बदकिस्मती करार दिया। उन्होंने सचखंड श्री हजूर साहिब में सुखबीर सिंह बादल और उनके परिवार समेत गए सिखों पर हुए हमले को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि गुरुघरों में गुरु मर्यादा के खिलाफ होने वाली घटनाओं से सभी को सबक लेने की जरूरत है। धामी ने कहा कि सिखों को विरोधियों के हाथों की कठपुतली बनकर ऐसा इतिहास नहीं बनाना चाहिए, जिसे भविष्य में काले अक्षरों में लिखा जाए। उन्होंने सिख संगत से गुरु इतिहास से सीख लेकर आपसी मतभेद खत्म करने और पंथ की चढ़दी कला के लिए मिलकर काम करने की अपील की। गुरबाणी प्रसारण के सवाल पर उन्होंने कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन है।

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