बहराइच नवाबगंज। मुहर्रम का त्योहार नज़दीक आने के साथ ही, इलाके में *ताज़िया* बनाने का काम तेज़ हो गया है। शहर और ग्रामीण इलाकों के कारीगर आकर्षक और रंग-बिरंगे *ताज़िया* बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। कई परिवारों ने घरों में ही *ताज़िया* बनाना और उन्हें बेचना शुरू कर दिया है। बाज़ार में *ताज़िया* की मांग बढ़ने के साथ ही, इनके उत्पादन में भी तेज़ी आ रही है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, नया साल मुहर्रम के महीने से शुरू होता है। इसी महीने में पैगंबर मुहम्मद के नवासे, हज़रत इमाम हुसैन, कर्बला में शहीद हुए थे। उनकी याद में हर साल मुहर्रम मनाया जाता है और *ताज़िया* जुलूस निकाले जाते हैं। इस मौके पर, खासकर शिया समुदाय मातम मनाकर उन्हें श्रद्धांजलि देता है। ताज़िया आयोजक साबिर अली शाह ने बताया कि इस साल भी मुहर्रम की तैयारियाँ ज़ोर-शोर से चल रही हैं। अलग-अलग इलाकों में सुंदर ताज़िये बनाए जा रहे हैं; थर्मोकोल से लेकर रंगीन कागज़ और सजावटी सामान जैसी चीज़ों का इस्तेमाल करके बारीक डिज़ाइन तैयार किए जा रहे हैं। कारीगर इदरी शाह, निसार अली और शोहरत अली शाह ने बताया कि ताज़िया तीन हिस्सों में बनाया जाता है: गुंबद, रोज़ा (मकबरे जैसा ढाँचा) और *तख़्त* (प्लेटफ़ॉर्म)। हर कारीगर अपनी कारीगरी से ताज़ियों को देखने में आकर्षक बनाने में जुटा हुआ है।