गणतंत्र दिवस केवल संविधान की वर्षगांठ नहीं, बल्कि उस संघर्ष, बलिदान और चेतना का उत्सव है, जिसकी नींव 1857 की क्रांति में पड़ी थी। आज जब देश 26 जनवरी को लोकतांत्रिक मूल्यों का उत्सव मनाता है, तब गोंडा की धरती पर जन्मे 1857 के महानायक महाराजा देवी बख्श सिंह की स्मृतियां स्वतः ही जीवंत हो उठती हैं। वह नायक, जिसने अंग्रेजी हुकूमत के सामने झुकने से इन्कार किया और अवध की क्रांति को निर्णायक दिशा दी।