देश को आजाद हुए दशकों बीत चुके हैं, लेकिन विदिशा जिले की सिरोंज तहसील के रुसली घाट टपरा के रहवासी आज भी ऐसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं, जिसे देखकर आजादी के मायने सवालों के घेरे में आ जाते हैं। महज 50-60 घरों और करीब 500 लोगों की इस बस्ती में विकास के नाम पर कुछ भी मौजूद नहीं है। न पक्की सड़क, न स्वास्थ्य सुविधा, न सुरक्षित आवागमन का साधन।
रुसली घाट टपरा रुसली और बमुलिया गांव के बीच स्थित है। यहां से बाहर निकलने के लिए ग्रामीणों के पास दो ही रास्ते हैं, दोनों ही खतरों से भरे हुए। पहला रास्ता खेतों की मेढ़ से होकर जाता है, जहां किसानों और अन्य लोगों की रोक-टोक, झगड़े और मारपीट तक की नौबत आ जाती है। कई बार रास्ते में जान-बूझकर झाड़ियां लगा दी जाती हैं या गड्ढे खोद दिए जाते हैं।
दूसरा रास्ता कैथन नदी से होकर गुजरता है, जहां साल भर तीन से चार फीट पानी भरा रहता है। मजबूरी में ग्रामीण इसी नदी के पानी से होकर बच्चों को स्कूल, मरीजों को इलाज और जरूरी कामों के लिए बाहर ले जाते हैं।
ये भी पढ़ें: Indore News: इंदौर के भागीरथपुरा में टंकी से शुरू हुई सप्लाई, सैंपल रिपोर्ट में साफ पानी
गांव में एंबुलेंस पहुंचना नामुमकिन
हालात ये हैं कि किसी के बीमार पड़ने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की स्थिति में यहां एंबुलेंस का पहुंचना नामुमकिन है, ऐसे में ग्रामीण खटिया का सहारा लेते हैं। नदी पार कर मरीज को कंधों पर उठाकर ले जाना यहां आम बात हो गई है। बारिश के दिनों में जब कैथन नदी ऊफान पर होती है, तब पूरा गांव मानो टापू बन जाता है और लोग बाहर निकलने में पूरी तरह असहाय हो जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। गांव में न अधिकारी आते हैं, न ही कोई जनप्रतिनिधि हालचाल लेने पहुंचता है। ग्रामीणों का आरोप है कि केवल चुनाव के समय नेता बड़ी-बड़ी गाड़ियों से गांव तक पहुंच जाते हैं, लेकिन उसके बाद पांच साल तक कोई नजर नहीं आता।
आजादी के इतने वर्षों बाद भी अगर लोगों को सुरक्षित रास्ता तक न मिले, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रुसली घाट टपरा के रहवासी आज भी एक पक्के रास्ते, बुनियादी सुविधाओं और सम्मानजनक जीवन की मांग कर रहे हैं।