नरसिंहपुर जिले के चारबहेरिया गांव में रहने वाले आदिवासी किसानों पर संकट के बादल छा गए हैं। वन विभाग द्वारा उनकी वर्षों पुरानी खेती की जमीन को नर्सरी के लिए अधिग्रहित किया जा रहा है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है। इस अन्याय के खिलाफ बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और न्याय की मांग की।
मामला नरसिंहपुर जिले के चारबहेरिया गांव के आदिवासी किसानों का है। जो पिछले 50 साल से वन परिक्षेत्र गोरखपुर के अंतर्गत कक्ष 126 और 127 में खेती कर रहे हैं, अब संकट में हैं। शासन द्वारा इस वन भूमि पर नर्सरी विकसित करने के लिए लगभग 25 से 30 एकड़ जमीन को घेर लिया गया है, जिससे इन किसानों की फसलें और जीविका खतरे में पड़ गई हैं।
किसानों का कहना है कि हम लोग वर्षों से यहां खेती कर रहे हैं। हमारी फसलें लगी हुई हैं, लेकिन बिना किसी सूचना के हमारी जमीन पर फेंसिंग कर दी गई। अब हमें जबरन हटाया जा रहा है। हम प्रशासन से न्याय की मांग कर रहे हैं। वन विभाग द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के यह कार्रवाई की गई, जिससे आदिवासी समाज में आक्रोश है। उनका कहना है कि खेती उनकी जीविका का एकमात्र साधन है और जबरन बेदखली से उनका परिवार भुखमरी की कगार पर आ जाएगा।
वहीं, अपर कलेक्टर अंजली शाह का कहना है कि हमें ज्ञापन प्राप्त हुआ है और हम इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करेंगे। सरकार की योजनाओं के तहत आदिवासियों के हितों की रक्षा की जाएगी। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या आदिवासी किसानों को उनका हक मिलेगा, या फिर उन्हें अपनी जमीन से हाथ धोना पड़ेगा।