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Umaria News: ईंधन बचाने की नसीहत और अफसरशाही का काफिला, पाली में केंद्रीय ऊर्जा सचिव की एंट्री बनी चर्चा

Sat, 23 May 2026 09:23 PM IST
उमरिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया

उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली में आज शनिवार भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल का दौरा इन दिनों चर्चाओं का विषय बना हुआ है। वजह रही उनका लंबा वीआईपी काफिला, जिसने प्रधानमंत्री की ईंधन बचत मुहिम पर ही सवाल खड़े कर दिए। एक तरफ देशभर में पेट्रोल-डीजल की बचत और सरकारी सादगी को लेकर संदेश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय ऊर्जा सचिव का 9 से 10 गाड़ियों वाला काफिला लोगों को हैरान करता नजर आया।

केंद्रीय ऊर्जा सचिव संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के निरीक्षण के लिए पाली पहुंचे थे। यहां उन्होंने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर संयंत्र की व्यवस्थाओं और संचालन को लेकर समीक्षा की। अधिकारियों ने उन्हें उत्पादन और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी दी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि ताप विद्युत केंद्र वर्षों से कई समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण के दौरान केवल औपचारिक बैठकों तक ही सीमित दिखाई देते हैं।

दौरे के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा सचिव के वीआईपी मूवमेंट को लेकर रही। लोगों के मुताबिक दर्जनों सुरक्षाकर्मी और 9 से 10 वाहनों का काफिला पूरे क्षेत्र में घूमता रहा। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब देश का नेतृत्व खुद अपने काफिले को छोटा कर सादगी का संदेश दे रहा है, तब बड़े अधिकारी इतनी भारी व्यवस्था के साथ क्यों चल रहे हैं।

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निरीक्षण के बाद केंद्रीय ऊर्जा सचिव मां बिरासिनी मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। लेकिन यहां भी उनका काफिला लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया। मंदिर के प्रवेश द्वार के पास एक साथ कई वाहनों के पहुंचने से कुछ देर के लिए जाम की स्थिति बन गई। दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को रुककर इंतजार करना पड़ा। लोगों के बीच चर्चा रही कि वीआईपी व्यवस्था के कारण आम श्रद्धालुओं को असुविधा झेलनी पड़ी।

इस पूरे दौरे में एक और बात लोगों को खटकती रही। जब मीडिया ने संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र की समस्याओं, बिजली उत्पादन और स्थानीय मुद्दों को लेकर केंद्रीय ऊर्जा सचिव से सवाल पूछने चाहे, तब उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। पत्रकारों के सवालों से बचते हुए वह सीधे वहां से निकल गए। इससे मीडिया कर्मियों में भी नाराजगी दिखाई दी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े अधिकारी जब क्षेत्र में आते हैं तो आम जनता को उम्मीद रहती है कि समस्याओं पर खुलकर चर्चा होगी और समाधान की दिशा में ठोस बात सामने आएगी, लेकिन यहां पूरा फोकस केवल प्रोटोकॉल और वीआईपी व्यवस्था पर ही नजर आया।

पाली में हुए इस दौरे ने एक बार फिर सरकारी अफसरशाही की कार्यशैली और वीआईपी संस्कृति को लेकर बहस छेड़ दी है। अब लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर ईंधन बचाने और सादगी अपनाने की जिम्मेदारी सिर्फ आम जनता की है या फिर बड़े अधिकारियों को भी इसका पालन करना चाहिए।

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