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Umaria News: बेदखली आदेश के साथ लगा 98 लाख 29 हजार 117 रुपये का दंड, जानें पूरा मामला

Thu, 17 Oct 2024 07:01 PM IST
उमरिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया

जिले के इतिहास में पहली बार इतना बड़ा जुर्माना 15 दिन में जमा करने और बेदखली का आदेश चारों तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला कुछ ऐसा हुआ कि भाई-भाई का आपस में जमीन को लेकर विवाद हुआ और विवाद इतना बढ़ा कि मामला डीजे कोर्ट तक पहुंच गया। बड़े भाई रमेश चन्द्र सचदेव ने पिताजी के द्वारा खरीदी गई ग्राम लोढ़ा में डेढ़ एकड़ जमीन में अपना हिस्सा मांगा। जिसमें 7 भाई और मां के नाम होने पर एक भाई ने यह कह कर हिस्सा देने को मना कर दिया कि उमरिया में पूरी जमीन आपके नाम है। इस पर रमेश चन्द्र को लालच सवार हो गया कि इसमें भी हमको हिस्सा चाहिए और उमरिया की जमीन में सभी को मैं दिया हूँ।

इसी बात को लेकर रमेश चंद्र ने डीजे कोर्ट में अपील कर दिया और जिस नजूल भूमि में रह रहे थे उसका भू-भाटक किसी ने जमा नही किया। डीजे कोर्ट ने सारा मामला सुनने के बाद कलेक्टर न्यायालय को निर्देशित कर दिया कि वो इस मामले पर विधि संगत कार्रवाई करें। डीजे कोर्ट के आदेश के बाद कलेक्टर उमरिया ने यह मामला अपर कलेक्टर कोर्ट में भेज दिया। जहां सुनवाई होती रही और उसके विरुद्ध अनावेदक ठाकुर दास सचदेव द्वारा कमिश्नर न्यायालय में निगरानी पेश की गई, लेकिन वहां भी अदम पैरवी में मामला खारिज हो गया। जिसके बाद अपर कलेक्टर न्यायालय ने अधिरोपित करते हुए 15 दिन में जमा करने का आदेश पारित कर दिया, साथ ही भूमि रिक्त करने का भी आदेश पारित कर दिया।

डीजे कोर्ट के आदेश के बाद कलेक्टर उमरिया ने यह मामला अपर कलेक्टर कोर्ट में भेज दिया। जहां सुनवाई होती रही और उसके विरुद्ध अनावेदक ठाकुर दास सचदेव द्वारा कमिश्नर न्यायालय में निगरानी पेश की गई, लेकिन वहां भी अदम पैरवी में मामला खारिज हो गया। जिसके बाद अपर कलेक्टर न्यायालय ने 98 लाख 29 हजार 117 रुपये का दण्ड अधिरोपित करते हुए 15 दिन में जमा करने का आदेश पारित कर दिया, साथ ही भूमि रिक्त करने का भी आदेश पारित कर दिया।

इस मामले में अपर कलेक्टर शिव गोविंद मरकाम ने बताया कि मामला उमरिया जिले के जिला मुख्यालय का है, जहां सालों से संचालित बांधवगढ़ होटल की लीज सरकार को यह कहकर ली गई थी कि वह रहवासी प्रयोजन करेगा, परंतु संबंधित ने उसे व्यवसायिक बना दिया। साथ ही खाली पड़ी भूमि पर अतिक्रमण भी कर लिया। मामले को लेकर जिला सत्र न्यायालय में सुनवाई हुई और न्यायालय ने संबंधित अतिक्रमणकारी को दोषी मानते हुए सरकारी भूमि खाली कराने का फरमान जारी किया है। वहीं अपर कलेक्टर न्यायालय ने लीज पट्टे से हटकर काम करने को उसका उपयोग व्यवसायिक रुप से किया गया, जिसमें शासन को क्षति पहुंची है, इसको लेकर अपर कलेक्टर न्यायालय ने 98 लाख 29 हजार 117 रुपए का अर्थदंड लगाया है, जिसे जमा करने की अवधि 15 दिवस में दी गई है।

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